गम्हरिया। जमशेदपुर डेयरी के कर्मचारी रविंद्र नाथ ठाकुर की संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को परिजनों और ग्रामीणों ने डेयरी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना और गेट जाम शुरू किया। पूरे दिन चले इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने शाम में प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाते हुए कई लोगों को हिरासत में लेकर आदित्यपुर थाना पहुंचाया। पुलिस की इस कार्रवाई से परिजनों और समर्थकों में भारी नाराजगी है।
मृतक की पत्नी तारा देवी ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच में जहर से मौत की पुष्टि होने के बावजूद डेयरी प्रबंधन के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ पुलिस ने सख्ती और बर्बरता दिखाई।
सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक पूरी तरह ठप रहा आवागमन
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सुबह आठ बजे से परिजनों और ग्रामीणों ने डेयरी के मुख्य प्रवेश द्वार को जाम कर दिया। आंदोलनकारियों ने डेयरी परिसर में किसी भी कर्मचारी या दूध आपूर्ति करने वाले वाहन को प्रवेश नहीं करने दिया। इसके कारण गेट के बाहर दूध से लदे दर्जनों वाहन घंटों फंसे रहे और डेयरी का संचालन प्रभावित हुआ।
दिनभर प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। शाम तक धरना और गेट जाम जारी रहा।
हत्या का केस, 25 लाख मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग
आंदोलनकारियों ने रविंद्र नाथ ठाकुर की मौत को हत्या बताते हुए दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। साथ ही मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और आश्रित को स्थायी नौकरी देने की भी मांग रखी गई।
एसडीपीओ के आश्वासन के बाद एक सप्ताह के लिए स्थगित हुआ आंदोलन
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद आदित्यपुर थाना में एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज की मौजूदगी में परिजनों के साथ वार्ता हुई। अधिकारियों की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को फिलहाल एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं समाजसेवी रश्मि भेंगरा ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी न्याय की गुहार लगाई जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
रविंद्र नाथ ठाकुर पिछले करीब 30 वर्षों से आदित्यपुर स्थित जमशेदपुर डेयरी में कार्यरत थे। 17 जून की सुबह ड्यूटी के दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। आरोप है कि समुचित इलाज उपलब्ध कराने के बजाय कंपनी के दो कर्मचारियों ने शाम करीब साढ़े चार बजे उन्हें टेंपो से उनके घर पहुंचा दिया।
इसके बाद परिजनों ने उन्हें ईएसआई अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से बेहतर इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार टीएमएच में चिकित्सकों ने उनके शरीर में जहर होने की पुष्टि की, जिसके बाद उन्हें रिम्स, रांची भेजा गया। 20 जून को रिम्स में भर्ती होने के बाद 21 जून की दोपहर करीब 2:48 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अब परिजन इस पूरे मामले में डेयरी प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
