रवींद्र नाथ चौबे
मेरा यह दृढ़ मानना है कि पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के वरीय आरक्षी अधीक्षक (SSP) श्री पीयूष पांडे को पद से हटाने का मुख्यमंत्री का निर्णय पूरी तरह सही और स्वागत योग्य है। इसके पीछे बेहद ठोस कारण हैं:
लचर पुलिसिंग और गिरती छवि: पिछले करीब सवा-डेढ़ साल से जमशेदपुर में पुलिसिंग का स्तर लगातार गिर रहा था और विभाग की छवि पर बट्टा लग रहा था।
अपराधियों में खत्म हुआ खौफ: अपराधियों के मन से पुलिस का इकबाल (खौफ) पूरी तरह खत्म होता हुआ दिख रहा था, जिससे आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही थी।
केवल चालान तक सीमित कार्यशैली: जमशेदपुर पुलिस का पूरा ध्यान केवल सड़कों पर ‘हेलमेट चेकिंग’ करने और चालान काटने पर ही केंद्रित नजर आ रहा था। बाकी सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों और अपराध नियंत्रण में पुलिस पूरी तरह असफल प्रतीत हो रही थी। ऐसे में जनभावनाओं को देखते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाना बिल्कुल न्यायसंगत है।
सरायकेला-खरसावां: एसपी निधि द्विवेदी को हटाना प्रशासन की बड़ी भूल
मेरा मानना है कि सरायकेला-खरसावां के आरक्षी अधीक्षक (SP) पद से श्रीमती निधि द्विवेदी को हटाने का निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है।
अल्पकाल में बेहतरीन कार्य: श्रीमती निधि द्विवेदी का कार्यकाल भले ही बहुत छोटा (अल्पकाल) रहा, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने जिले की पुलिसिंग व्यवस्था को एक सही और सकारात्मक दिशा दे दी थी।
जनता का बढ़ता विश्वास: अपनी कड़क और निष्पक्ष कार्यशैली के बल पर वे बहुत तेजी से आम जनता के बीच पुलिस के प्रति खोया हुआ विश्वास बहाल कर रही थीं। उन्हें इस तरह अचानक हटाना प्रशासनिक रूप से एक गलत फैसला है।
पूरे झारखंड को है ‘कड़क पुलिसिंग’ की दरकार
अंत में, मैं यही कहना चाहूंगा कि बात सिर्फ जमशेदपुर या सरायकेला की नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में पुलिसिंग व्यवस्था को बेहद कड़क, चुस्त-दुरुस्त और संवेदनशील बनाने की सख्त जरूरत है, ताकि राज्य में कानून का राज और मजबूत हो सके।
(लेखक जमशेदपुर आदित्यपुर निवासी हैं। समाजवादी विचारधारा के प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक रविंद्र नाथ चौबे ने समाज विज्ञानी के रूप में इस हालिया घटनाक्रम को देखा है)

