August 28, 2026
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भोजपुर एनकाउंटर: पोस्टमार्टम में पांच गोलियों की पुष्टि

भोजपुर एनकाउंटर: पोस्टमार्टम में पांच गोलियों की पुष्टि

 

सीएम सम्राट चौधरी ने भोजपुर मामले में न्यायिक आयोग गठन का एलान किया

मुख्य बिंदु:

  • भरत तिवारी को मुठभेड़ में लगी थीं कुल पांच गोलियां: पोस्टमार्टम रिपोर्ट
  • फर्जी एनकाउंटर विवाद पर सरकार ने बनाया उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग
  • सीएम बोले- दोषी नहीं बचेंगे, 30 दिन में न्याय न मिलने पर अधिकारी निलंबित

पटना – बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ कांड को लेकर पोस्टमार्टम जांच रिपोर्ट से नई और अहम जानकारी सामने आई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दोहराया है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस को मिली पोस्टमार्टम जांच रिपोर्ट में अहम पुष्टि हुई है। भरत तिवारी के शरीर पर कुल पांच गोलियों के निशान मिले हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक पहली गोली बायीं जांघ के ऊपरी भाग में सामने से धंसी थी। दूसरी गोली भी बायीं जांघ में लगी, मगर यह मध्य हिस्से के भीतरी भाग में पाई गई।

इसके अलावा तीसरी गोली दाहिनी जांघ के बीचोंबीच भीतरी ओर से लगी। चौथी गोली दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से से अंदर की दिशा में गई थी।

वहीं पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की ओर से शरीर में दाखिल हुई। इन निशानों के आधार पर जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम को फिर से परख रही हैं।

भरत तिवारी की मौत को कथित फर्जी मुठभेड़ बताया जा रहा है। इसके चलते राज्य की सियासत में बीते कई दिनों से उबाल है।

विपक्षी महागठबंधन सरकार पर निरंतर निशाना साध रहा है। वह घटना की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार कर रहा है।

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि कोई भी दोषी बचेगा नहीं। उन्होंने बताया कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है।

सरकार ने तत्काल एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग बनाने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी पिछले विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बने थे।

वह लंबे समय तक सीएम रहे नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी माने जाते हैं। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पटना में यह बात कही।

उन्होंने यह बयान ‘संविधान हत्या दिवस’ समारोह के मंच से दिया। यह आयोजन हर वर्ष 25 जून को आपातकाल की बरसी पर किया जाता है।

इसे भाजपा और राजग के घटक दल मिलकर मनाते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने अपना बयान दिया।

उन्होंने कहा, “सरकार किसी भी गंभीर मसले पर फौरन संज्ञान लेती है। भोजपुर मामले में भी तेजी से उच्च स्तरीय जांच आयोग बनाया गया है। हमारा मकसद न्याय दिलाना है और दोषी पाए जाने पर कठोर सजा मिलेगी।”

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने एक बड़ी प्रशासनिक घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि किसी आवेदन पर 30 दिन में आदेश जरूरी होगा।

ऐसा न होने पर इकतीसवें दिन संबंधित अधिकारी निलंबित कर दिया जाएगा। यह आदेश सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी किया जाएगा।

हालांकि विपक्ष इसे चुनावी वर्ष की रणनीति करार दे रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार जनता को समय पर न्याय मिलना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भोजपुर एनकाउंटर मामला अभी राज्य की सबसे बड़ी सियासी बहस बना हुआ है।

आगे की कार्रवाई न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)

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