नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष से पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई है। इन सांसदों ने त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़ने का ऐलान किया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले में संबंधित 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और महासचिव को अलग से नोटिस जारी नहीं किया गया। कोर्ट ने ध्यान दिया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उनकी ओर से पेश हो रहे हैं।

अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले में देरी का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 20 सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में देरी हो रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा अध्यक्ष को संविधान के दल-बदल रोधी प्रावधानों के तहत इन याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से पहले ही इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल की जा चुकी हैं।
20 सांसदों के दूसरे दल से जुड़ने पर विवाद
विवाद उस समय शुरू हुआ जब TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की कि वे त्रिपुरा आधारित राजनीतिक संगठन NCPI में शामिल हो गए हैं या उसका हिस्सा बन गए हैं। इसके बाद इन सांसदों ने लोकसभा में अपने लिए एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की।
बागी सांसदों को संसद में NCPI के समूह के तौर पर मान्यता मिली और उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय गतिविधियों में भी भाग लिया।
TMC का तर्क है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। पार्टी के मुताबिक, किसी दूसरे राजनीतिक संगठन से जुड़ने का उनका फैसला स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के समान है। इसलिए दल-बदल रोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म की जानी चाहिए।
बागी सांसदों ने बताया वैध विलय
दूसरी ओर, बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम संविधान के तहत वैध राजनीतिक विलय के दायरे में आता है। उनका दावा है कि उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई का कोई आधार नहीं है।
याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव के साथ उन सभी 20 सांसदों को भी प्रतिवादी बनाया गया है, जिनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है।
इन सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सायनी घोष, बापी हलदर, मोहम्मद अबू ताहेर खान, कालीपद सरेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं।
शिवसेना (UBT) की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित
इसी तरह का एक अन्य मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपनी याचिका में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दिए जाने को चुनौती दी है।
ऐसे में TMC के 20 सांसदों से जुड़ा मामला भी दल-बदल कानून के तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता और विधानसभा या लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों से जुड़ा हुआ है।