पोटका : पोटका में ब्रेन मलेरिया से तीन मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया (सेरेब्रल मलेरिया) से लगातार तीन लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
शनिवार को राज्यस्तरीय वेक्टर बॉर्न डिजीज (VBD) कंसल्टेंट, जिला मलेरिया पदाधिकारी तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका की संयुक्त टीम ने प्रभावित गांवों का व्यापक दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने केजीबीवी (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय) की एक छात्रा समेत हितबासा, कांदर और सानग्राम गांव में हुई तीन मौतों के बाद प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली।
टीम में राज्यस्तरीय वीबीडी कंसल्टेंट विनय कुमार, मलेरिया विभाग के जयंत कुमार एवं अनील कुमार के अलावा जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धाउड़िया शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गांवों में डीडीटी छिड़काव की प्रगति, साफ-सफाई की व्यवस्था, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की स्थिति, बुखार पीड़ितों की जांच, दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण की गहन समीक्षा की।
साथ ही ग्रामीणों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा बुखार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह भी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उपचार प्रक्रिया और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की भी जानकारी ली। समाचार लिखे जाने तक टीम का विभिन्न गांवों में निरीक्षण एवं सर्वेक्षण जारी था।
ब्रेन मलेरिया क्या है और क्यों है खतरनाक?
ब्रेन मलेरिया, जिसे चिकित्सकीय भाषा में सेरेब्रल मलेरिया कहा जाता है, मलेरिया का सबसे गंभीर रूप माना जाता है। यह मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी के संक्रमण से होता है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह संक्रमण मस्तिष्क को प्रभावित कर देता है, जिससे मरीज बेहोशी, दौरे, भ्रम, कोमा और कई मामलों में मृत्यु का शिकार हो सकता है।
मानसून में बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में जगह-जगह जलजमाव होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है, जिससे मलेरिया फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार बुखार के मरीजों की जांच, दवा वितरण, डीडीटी छिड़काव और जनजागरूकता अभियान चला रहा है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।


वैसे शुरू में ही यदि स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो जाता तो मौत की संख्या कम हो सकती थी।
