केजरीवाल के विरोध पर बोले मंत्री- सालों मंदिर का किया विरोध, अब राजनीति
मुख्य बिंदु:
- यूपी के मंत्री संजय निषाद बोले- राम मंदिर चंदा मामले में कोई दोषी नहीं बचेगा
- केजरीवाल पर साधु-संतों के विरोध को बताया विपक्ष का पाखंड
- ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम त्याग चक्र पर अंकित होने का किया स्वागत
लखनऊ – उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने शुक्रवार को राम मंदिर चंदा विवाद से लेकर बंगाल की राजनीति तक कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने शुक्रवार को कई विषयों पर बात रखी। राम मंदिर चंदा विवाद पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
उनके मुताबिक मामले की सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मंत्री ने कहा कि किसी भी दोषी को बचने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है। सबूत मिलने पर अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
इसके साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जांच एजेंसियों पर भरोसा जरूरी है।
मंत्री के अनुसार बिना सबूत न कोई एफआईआर दर्ज होती है और न कार्रवाई होती है। उन्होंने सवाल किया कि सबूत न होने पर एफआईआर कैसे दर्ज हो सकती थी।
इसके अलावा अयोध्या में अरविंद केजरीवाल को साधु-संतों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इस सवाल पर मंत्री ने विपक्षी दलों पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा और बसपा ने वर्षों तक राम मंदिर का विरोध किया। मंदिर निर्माण के दौरान भी इन दलों ने विरोध जताया था, अब सिर्फ राजनीति हो रही है।
वहीं ममता बनर्जी द्वारा 21 जुलाई को शहीदी दिवस रैली के ऐलान पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में अंतिम फैसला हमेशा जनता ही करती है।
जनता ही सबसे बड़ी जज होती है और उसने अपना फैसला सुना दिया है।” मंत्री ने सुझाव दिया कि अब विपक्षी दलों को आत्ममंथन करना चाहिए।
इसी क्रम में ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह सैनिकों के नाम त्याग चक्र पर लिखे जाएंगे। इस फैसले का स्वागत करते हुए संजय निषाद ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि मोदी हैं तो मुमकिन है, राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि रहता है। मंत्री ने कहा कि सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को सम्मान मिलना ही चाहिए।
उनके मुताबिक पिछली सरकारों में ऐसे प्रयास बहुत कम देखे गए थे। साथ ही पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता की मांग पर भी मंत्री ने राय रखी।
उन्होंने कहा कि जनहित में लिए गए फैसलों का स्वागत होना चाहिए। मंत्री के मुताबिक बंगाल पहले देश के विकास का मॉडल माना जाता था।
उनका कहना है कि राजनीतिक कारणों से वहां विकास प्रभावित हुआ। अब सुधार की दिशा में कदम उठना सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
इसके अलावा लोचन निषाद, समाधान निषाद और 167 क्रांतिकारियों की 170वीं शहादत दिवस का जिक्र हुआ। मंत्री ने कहा कि भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है।
उन्होंने बताया कि अंग्रेजों और विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ निषाद समाज का बड़ा योगदान था। उनके अनुसार 27 जून के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
इस बीच अखिलेश यादव के पूर्वांचल दौरों पर भी मंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता के बीच पहुंचने में उन्हें बहुत देर हो चुकी है।
मंत्री के मुताबिक नेता का भाग्य आखिरकार मतदाता ही तय करता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता के बीच जाना पर्याप्त नहीं होता।
अंत में राहुल गांधी के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के दो साल पूरे होने पर सवाल पूछा गया। इस पर मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।
उन्होंने कहा कि जनता ने लंबे समय कांग्रेस पर भरोसा किया था। उनके अनुसार पार्टी उस भरोसे पर खरी नहीं उतर सकी।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
