रूपा गांगुली ने की डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा लगाने की मांग
मुख्य बिंदु:
- भाजपा विधायकों ने विधानसभा ओरिएंटेशन कार्यक्रम को सराहा
- रूपा गांगुली ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा की मांग रखी
- टीएमसी भवन विवाद पर भाजपा ने बताया आंतरिक मामला
कोलकाता – पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पर भाजपा विधायकों ने संतोष व्यक्त किया है।
कोलकाता में आयोजित इस दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का बुधवार को दूसरा दिन रहा। भाजपा विधायकों ने कहा कि इससे जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यप्रणाली समझने में मदद मिलेगी।
उनके अनुसार, यह पहल विधायकों को प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर देगी। पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में नए सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
भाजपा विधायक राजेश कुमार ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। उन्होंने बताया कि कई वरिष्ठ विधायकों के अनुसार पहले कभी ऐसा प्रशिक्षण आयोजित नहीं हुआ।
इस प्रशिक्षण में विधायकों को सदन की कार्यवाही में सार्थक योगदान देना सिखाया जा रहा है। राजेश कुमार का मानना है कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं और मजबूत होंगी।
वहीं, भाजपा विधायक दीपांजन गुहा ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए समझाया, “पूजा के बर्तन नियमित सफाई से ही चमकते रहते हैं, वैसे ही जनप्रतिनिधियों को भी लगातार सीखते रहना जरूरी है।” पहली बार विधायक बनने के कारण उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।
इसके अलावा, भाजपा विधायक रूपा गांगुली ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि संसद में इस तरह के ओरिएंटेशन नियमित रूप से होते हैं और उनके नियम भी तय हैं।
उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह आयोजन पहली बार हो रहा है। इससे सदन की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी।
रूपा गांगुली ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, डॉ. मुखर्जी के संघर्ष के कारण ही पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रह सका।
गौरतलब है कि डॉ. मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो बाद में भाजपा का आधार बना। रूपा गांगुली ने राज्य में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग रखी।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी के गुट द्वारा टीएमसी भवन पर कब्जे का विवाद भी चर्चा में रहा। भाजपा विधायक भास्कर भट्टाचार्य ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया।
उन्होंने कहा कि जनता पूरा घटनाक्रम देख रही है। इस पर जवाब संबंधित पक्षों को ही देना होगा।
हालांकि, ओरिएंटेशन कार्यक्रम को लेकर भास्कर भट्टाचार्य ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने इसे एक स्वागतयोग्य पहल करार दिया।
उनके अनुसार, केवल चुनाव जीतना पर्याप्त नहीं है। विधानसभा में प्रभावी ढंग से बोलना और संसदीय परंपराओं का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
भास्कर भट्टाचार्य ने भरोसा जताया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद यह प्रशिक्षण सदन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाएगा। इससे पहले भी राज्य विधानसभा में कामकाज को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा फिलहाल प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस सत्तारूढ़ दल है। ऐसे में सदन के भीतर सहयोग और टकराव, दोनों की स्थितियां लगातार सामने आती रही हैं।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
