चाकुलिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार देर रात हाथियों के एक दल ने नया बाजार स्थित बालाजी साबुन फैक्ट्री में घुसकर दीवार तोड़ दी और परिसर में जमकर उत्पात मचाया। लगातार हो रहे हमलों से फैक्ट्री संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मजदूरों में भी दहशत का माहौल है।
नया बाजार इलाके में स्थित कल-कारखाने लगातार हाथियों के निशाने पर हैं। शनिवार देर रात जंगली हाथियों का एक दल नगर पंचायत के वार्ड संख्या-11 में पहुंच गया और बालाजी साबुन फैक्ट्री की चारदीवारी तोड़कर परिसर में घुस गया।
हाथियों ने फैक्ट्री परिसर में काफी देर तक उत्पात मचाया, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इसके बाद हाथियों का झुंड गौशाला के समीप स्थित जंगल की ओर लौट गया, जहां अब भी उनके डेरा जमाए होने की सूचना है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथियों की मौजूदगी से पूरे इलाके में भय का माहौल है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
बालाजी साबुन फैक्ट्री के संचालक शंकर लाल रूंगटा ने बताया कि पिछले दो वर्षों से जंगली हाथियों के लगातार हमलों के कारण उनकी फैक्ट्री को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कई बार हाथियों ने फैक्ट्री परिसर में घुसकर दीवारें, संरचनाएं और अन्य सामान क्षतिग्रस्त किए हैं। बार-बार होने वाली घटनाओं के कारण मजदूर भी फैक्ट्री में काम करने से डर रहे हैं। सुरक्षा को लेकर बनी चिंता के चलते श्रमिकों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और फैक्ट्री बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है।
चाकुलिया और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जंगलों से निकलकर हाथियों के झुंड अक्सर आबादी वाले इलाकों, खेतों और औद्योगिक परिसरों में पहुंच जाते हैं।
कई बार फसलों के साथ-साथ मकानों और छोटे उद्योगों को भी नुकसान हुआ है। स्थानीय लोग लंबे समय से वन विभाग से स्थायी समाधान और हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल गौशाला के समीप जंगल में हाथियों का झुंड मौजूद होने के कारण आसपास के गांवों और औद्योगिक क्षेत्र में अलर्ट जारी है। प्रशासन और वन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
हालात यह यह है कि भयभीत मजदूरों के कारण उद्यमियों को यह चिंता सता रही है कि मजदूर यदि कम आएंगे तो उनका काम कैसे चलेगा।
