विपक्ष ने सीजेआई को पत्र लिखकर एसआईआर पर रोक की मांग की, चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का लगाया आरोप

Town Post Live 24×7
LIVE

TOWN POST LIVE 24×7

Breaking News • Jharkhand • Bihar • India

▶ WATCH LIVE
🔴 BREAKING NEWS • WATCH TOWN POST LIVE 24×7 • LIVE COVERAGE • JHARKHAND • BIHAR • INDIA • POLITICS • CRIME • SPORTS • BUSINESS • ENTERTAINMENT • WEATHER • EXCLUSIVE REPORTS • CLICK ANYWHERE ON THIS BANNER TO WATCH LIVE • 🔴 BREAKING NEWS • WATCH TOWN POST LIVE 24×7 • LIVE COVERAGE • JHARKHAND • BIHAR • INDIA • POLITICS • CRIME • SPORTS • BUSINESS • ENTERTAINMENT • WEATHER • EXCLUSIVE REPORTS •

नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। देश के 23 प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को संयुक्त पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रिया में कथित हेरफेर पर गंभीर चिंता जताई है। विपक्ष ने मतदाता सत्यापन की मौजूदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि इससे लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हो रही है।

पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत इंडी गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के 23 नेताओं के हस्ताक्षर हैं। विपक्ष का कहना है कि उन्होंने यह असाधारण कदम इसलिए उठाया है क्योंकि गणतंत्र के मूल स्तंभ गंभीर दबाव में हैं।

पत्र में नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मूल अवधारणा से समझौता किया जा रहा है, जिसके कारण हालिया चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्र में कहा गया, “हम सभी समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भाजपा के विरोधी हैं। हमारा मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर किया जा रहा है और कई मामलों में चुनाव परिणाम जनता की वास्तविक इच्छा को प्रतिबिंबित नहीं करते।”

विपक्ष की सबसे बड़ी आपत्ति चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर है। विपक्ष ने इसे “स्वभाव से ही बहिष्करणकारी और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वास्तविक मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो गए हैं। इनमें विशेष रूप से गरीब, अशिक्षित, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हैं, जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

28 जून को लिखे गए इस पत्र पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के तिरुचि शिवा, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा और माकपा सांसद जॉन ब्रिटास सहित कई विपक्षी नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं।

इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद, भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सैयद सादिक अली शिहाब थंगल, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, एमडीएमके प्रमुख वाइको, वीसीके नेता थोल तिरुमावलवन और आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन भी हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल हैं।

पत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नामक श्रेणी के तहत 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, जिससे वे मतदान नहीं कर सके।

विपक्ष ने इस दावे के समर्थन में न्यायिक ट्रिब्यूनलों के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया। पत्र के अनुसार, न्यायमूर्ति टी.एस. शिवगणनम की अध्यक्षता वाले 19 ट्रिब्यूनलों में से एक ने 1,777 अपीलों की सुनवाई के दौरान पाया कि 1,717 मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए थे। यानी लगभग 96 प्रतिशत नामों को अनुचित रूप से सूची से हटाया गया था।

विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के अलावा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर भी चिंता जताई और चुनाव प्रक्रिया में जनता का पूर्ण विश्वास बहाल करने के लिए बैलेट पेपर प्रणाली पर दोबारा व्यापक सार्वजनिक चर्चा की मांग की।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का व्यवस्थित तरीके से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

पत्र के अंत में नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट को संविधान का अंतिम संरक्षक बताते हुए कहा कि जब अन्य संस्थाएं नागरिकों को न्याय देने में विफल हो जाती हैं, तब लोगों की अंतिम उम्मीद न्यायपालिका ही होती है।

उन्होंने अपनी अंतिम अपील में लिखा, “जब संस्थाएं स्वयं दमन का साधन बन जाएं और सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने लगें, तब हमारे लोकतंत्र का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ जाता है।”

डीएससी

Join Our Newsletter

यह भी पढ़ें

झारखंड में पिछले छह-सात वर्षों में बढ़ा अपराध का ग्राफ : सांसद विद्युत वरण महतो

जमशेदपुर, 3 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड के जमशेदपुर में करनी सेना के नेता हिमांशु सिंह की हत्या और शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के विरोध...

जमशेदपुर: हिमांशु सिंह हत्याकांड के बाद डबल डाउन बार पर बड़ी कार्रवाई, NOC निलंबित, अगले आदेश तक बंद रहेगा बार

जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन (Double Down) बार के बाहर करनी सेना युवा मोर्चा के नेता हिमांशु सिंह की हत्या के बाद जिला प्रशासन...

अभिमत

जमशेदपुर: एसएसपी पीयूष पांडे को हटाना जनभावनाओं के अनुरूप

रवींद्र नाथ चौबे ​मेरा यह दृढ़ मानना है कि पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के वरीय आरक्षी अधीक्षक (SSP) श्री पीयूष पांडे को पद से हटाने का...

झारखंड में हिमांशु सिंह हत्याकांड पर मुख्यमंत्री का त्वरित फैसला, स्वागतयोग्य

जमशेदपुर के हिमांशु सिंह हत्याकांड के बाद मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई का स्वागत, लेकिन अब निष्पक्ष जांच, दोषियों को कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित करना सबसे बड़ी आवश्यकता है।

संपादक की पसंद

Chaibasa News: गुलगुला खाते समय श्वासनली में फंसा निवाला, युवक की तड़प-तड़प कर मौत

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से सटे घाघरी गांव में एक बेहद दर्दनाक हादसे में 28 वर्षीय युवक की जान चली गई। खेत...

जमशेदपुर में धारा 163 लागू, सात थाना क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंध

जमशेदपुर के सात थाना क्षेत्रों में धारा 163 लागू कर दी गई है। धरना-प्रदर्शन, पांच से अधिक लोगों के जुटने और बिना अनुमति लाउडस्पीकर के उपयोग पर रोक रहेगी। आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।

Feel like reacting? Express your views here!

यह भी

आपकी राय

अन्य समाचार व अभिमत