शराब घोटाले की जांच में रोहित उरांव ने मांगा अतिरिक्त समय, पिता को 30 जून को बुलाया
मुख्य बिंदु:
- रोहित उरांव ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए सोमवार को नहीं पहुंचे
- पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव को 30 जून को तलब किया गया
- छत्तीसगढ़ की शराब कंपनी से जुड़े मनी ट्रेल की हो रही जांच
रांची – झारखंड के बहुचर्चित आबकारी घोटाले में जांच एजेंसी ने सोमवार को कांग्रेस विधायक के बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। यह मामला राज्य की शराब घोटाले से जुड़ी जांच से जुड़ा है।
प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के बेटे रोहित उरांव को रांची स्थित दफ्तर बुलाया था। हालांकि, उन्होंने एजेंसी को पत्र भेजकर अतिरिक्त समय की मांग की।
इसी बीच, पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव को भी अब 30 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। सूत्रों के मुताबिक दोनों ने अपने पक्ष के दस्तावेज तैयार करने के लिए मोहलत मांगी है।
फिलहाल जांच एजेंसी ने इस अनुरोध पर कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, अगर दोनों तय तारीख पर हाजिर नहीं होते, तो एक सप्ताह के भीतर नया समन भेजा जा सकता है।
दरअसल, ईडी इस मामले में कथित मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है। साथ ही, राज्य की नई आबकारी नीति को लागू करने में निजी कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
एजेंसी को संदेह है कि छत्तीसगढ़ की कुछ कंपनियों को झारखंड में कारोबार दिलाने में रोहित उरांव की भी भूमिका रही। इनमें शराब आपूर्ति के साथ मैनपावर सप्लाई का ठेका भी शामिल बताया जा रहा है।
विशेष रूप से श्री ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड नामक छत्तीसगढ़ी कंपनी पर एजेंसी की नजर है। ईडी इस कंपनी को मिले ठेके से जुड़े वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
इससे पहले अगस्त 2023 में ईडी ने इस मामले में बड़े स्तर पर छापेमारी की थी। तब रांची, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और कोलकाता समेत 32 स्थानों पर कार्रवाई हुई थी।
उस दौरान रोहित उरांव के रांची स्थित घर से 30 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए थे। एजेंसी अब उस बरामद नकदी और निवेश के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज मामले के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अलग से केस दर्ज किया है। इससे पहले एसीबी ने नई आबकारी नीति में अनियमितताओं को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी।
उस प्राथमिकी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे का नाम भी शामिल है। इसके अलावा उत्पाद विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह और विनय सिंह समेत दस लोगों को आरोपी बनाया गया था।
एक सूत्र ने बताया, “जांच का दायरा अब प्रशासनिक से आगे राजनीतिक स्तर तक पहुंच चुका है।” इससे पहले ईडी कुछ गिरफ्तार आरोपियों से जेल में भी पूछताछ कर चुकी है।
झारखंड में बीते महीनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मामले में भी अदालत का फैसला आया था। राज्य में जांच एजेंसियों की सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
मामले से जुड़े धन प्रवाह और लाभार्थियों की भूमिका पर भी एजेंसी की पकड़ बनाने की कोशिश जारी है। आगे की कार्रवाई पूछताछ पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
