August 28, 2026
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HC ने अभिषेक बनर्जी छापे पर पुलिस से हलफनामा मांगा

HC ने अभिषेक बनर्जी छापे पर पुलिस से हलफनामा मांगा

कालीघाट रोड स्थित आवास पर सर्च ऑपरेशन को लेकर चार सप्ताह की मियाद तय

मुख्य बिंदु:

  • कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
  • तृणमूल महासचिव के घर हुई सुबह की रेड को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
  • सीसीटीवी और ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश

कोलकाता – कलकत्ता हाई कोर्ट की एक एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस को चार हफ्तों के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

यह विवाद दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड पर तृणमूल कांग्रेस महासचिव के निवास पर हुई सुबह की कार्रवाई से जुड़ा है। याचिका में इस छापेमारी को अदालत में चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने राज्य पुलिस को हलफनामा दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया।

इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि छापेमारी के दौरान हुई पूरी बातचीत के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। ऑडियो-विजुअल रिकॉर्ड भी संभाल कर रखने को कहा गया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य पुलिस के हलफनामे के दो सप्ताह बाद याचिकाकर्ता को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस तरह दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई 13 जून की सुबह करीब तीन बजे हुई थी। पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी थाने, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम इसमें शामिल थी।

टीम वास्तव में अभिषेक बनर्जी के कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की तलाश में पहुंची थी, जो अब तक फरार बताए जाते हैं। इसी तलाशी अभियान को लेकर अदालत में याचिका दाखिल हुई।

याचिका में आरोप लगाया गया कि सुबह-सुबह की गई इस कार्रवाई में राज्य पुलिस ने सीमा से अधिक सख्ती बरती। अभिषेक बनर्जी, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं, की ओर से पूर्व महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने पैरवी की।

दत्ता ने अदालत में दलील दी कि मूल शिकायत में अभिषेक बनर्जी का नाम कहीं नहीं था। उनके अनुसार, शिकायत केवल सुमित रॉय के विरुद्ध दर्ज की गई थी।

उन्होंने कहा कि महज इस संदेह पर पुलिस टीम तड़के घर पहुंची कि रॉय वहां छिपे हो सकते हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “इतनी भारी सुरक्षा के साथ रात में आना इलाके में हड़कंप मचा गया।”

दत्ता के मुताबिक, पुलिस दल ने राज्य आपदा प्रबंधन कर्मियों की मदद से मुख्य द्वार का ताला तोड़ा। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पूछा कि क्या आपत्ति सीधे सर्च ऑपरेशन पर है।

इसके जवाब में बताया गया कि मुख्य आपत्ति बिना वारंट के की गई कथित ज्यादती पर है। वकील ने राज्य पुलिस पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।

दूसरी ओर, राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सरकार का पक्ष रखा। उनका कहना था कि सुमित रॉय के फरार होने की आशंका के चलते ही यह कार्रवाई जरूरी हो गई थी।

यह मामला तृणमूल कांग्रेस और राज्य प्रशासन के बीच चल रहे टकराव की कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को लेकर ऐसे विवाद सामने आए हैं, जिनमें एक पूर्व विधायक की एनआईए हिरासत भी शामिल है।

इसके अलावा हाल ही में पार्टी के एक पार्षद की गिरफ्तारी भी भ्रष्टाचार के आरोपों में हुई थी। अदालत में अगली सुनवाई हलफनामा दाखिल होने के बाद तय होगी।

(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)

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