800 मेगावाट क्षमता की नई यूनिट से राज्य को मिलेगी 680 मेगावाट बिजली
मुख्य बिंदु:
- पतरातू की दूसरी 800 मेगावाट इकाई का कॉमर्शियल ऑपरेशन शुरू
- झारखंड को अब कुल 1,360 मेगावाट बिजली पतरातू से मिलेगी
- राज्य के पास जरूरत से करीब 600 मेगावाट अधिक बिजली होगी
रांची – झारखंड ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अब सरप्लस बिजली वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। रामगढ़ स्थित पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की दूसरी 800 मेगावाट इकाई का व्यावसायिक परिचालन बुधवार-गुरुवार की रात शुरू हो गया।
इस नई इकाई से मिलने वाली कुल बिजली में से 680 मेगावाट हिस्सा सीधे झारखंड को आवंटित किया जाएगा। इससे पहले नवंबर 2025 में चालू हुई पहली इकाई से भी राज्य को इतनी ही मात्रा में बिजली मिल रही थी।
दोनों इकाइयों के परिचालन में आने के बाद अब पतरातू परियोजना से अकेले झारखंड को 1,360 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकेगी। यह राज्य की कुल ऊर्जा आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा पूरा करेगा।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की वर्तमान औसत बिजली मांग लगभग 3,000 मेगावाट है। दूसरी ओर पतरातू की दोनों इकाइयों समेत अन्य स्रोतों से राज्य के पास अब करीब 3,885 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी।
इस हिसाब से झारखंड के पास जरूरत से लगभग 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली बचेगी। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने हाल ही में 2027 तक बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भी रखा था, जो अब पूरा होता दिख रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार नॉन-पीक आवर के दौरान इस अतिरिक्त बिजली को बेचकर राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकता है। एक ऊर्जा अधिकारी ने बताया, “यह आत्मनिर्भरता से कहीं आगे की बात है, अब हम बिजली बेचने की स्थिति में आ गए हैं।”
पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना में एनटीपीसी की 74 प्रतिशत और जेबीवीएनएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य कुल 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है। पहले चरण में 2,400 मेगावाट की तीन इकाइयां बनाई जा रही हैं, जिनमें से दो अब चालू हो चुकी हैं।
तीसरी इकाई के अगले कुछ महीनों में शुरू होने की संभावना जताई गई है। संयंत्र में अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो पारंपरिक तकनीक से बेहतर दक्षता देती है।
पर्यावरण पर असर कम करने के लिए एयर-कूल्ड कंडेंसर और शत-प्रतिशत ड्राई ऐश हैंडलिंग सिस्टम लगाया गया है। संयंत्र के लिए कोयला लातेहार के बनहर्दीह कोल ब्लॉक से और पानी पतरातू डैम से लिया जा रहा है।
हाल के महीनों में राज्य में बिजली दर बढ़ोतरी को लेकर भी विरोध देखा गया था, जिसे इस नई क्षमता से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इससे राज्य के सभी जिलों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी।
इसके अलावा राज्य को महंगी दरों पर बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदने की जरूरत भी घटेगी। वहीं उद्योगों को स्थिर और निर्बाध बिजली मिलने से निवेश और रोजगार के नए मौके बनने की संभावना जताई जा रही है।
रांची स्थित ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण मोड़ बताया है। आने वाले महीनों में तीसरी इकाई के शुरू होने के साथ झारखंड की बिजली उत्पादन क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
