रांची : झारखंड के दर्जनभर कोषागारों से अवैध वेतन निकासी का मामला उजागर होने के बाद झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने राज्य के सभी कोषागारों और उप-कोषागारों में बिलों के पारित होने की समय-सीमा निर्धारित कर दी है।
नए निर्देशों के अनुसार अब कोषागारों में सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक ही बिलों का निष्पादन और पारित किया जा सकेगा। निर्धारित समय के बाहर पास किए गए बिल स्वतः संदेह के दायरे में माने जाएंगे।
इस संबंध में वित्त विभाग ने 22 जून को आदेश जारी कर सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों तथा कोषागार एवं उप-कोषागार पदाधिकारियों को निर्देश भेजे हैं।
विभाग ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पिछले दिनों बोकारो, हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, व देवघर सहित कुछ जिलों में वेतन और अन्य मदों में अनियमित निकासी के मामले सामने आए थे।
इन घटनाओं को देखते हुए एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) के अंतर्गत निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) तथा कोषागार प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
वित्त सचिव ने 22 अप्रैल को सभी कोषागार एवं उप-कोषागार पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में बिल पारित करने की समय-सीमा तय करने पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उसी निर्णय के आधार पर अब डीडीओ स्तर पर भी बिल प्रस्तुत करने का समय निर्धारित किया गया है।
नए निर्देशों के तहत सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही बिल अपलोड और प्रस्तुत कर सकेंगे, जबकि कोषागार स्तर पर इन बिलों का निष्पादन और पारित करने का कार्य सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा।
वित्त विभाग ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों में इन समय-सीमाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं और अवैध निकासी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
वैसे नए नियम का असर लंबे समय के बाद दिखेगा लेकिन यदि समय-समय पर कोषागारों की निगरानी और जांच नहीं होगी तो गड़बड़ियों की गुंजाइश बरकरार रहेगी।
