दिग्विजय सिंह करेंगे अयोध्या में मुकदमा, चंदा वापसी की मांग
मुख्य बिंदु:
- गिरिराज सिंह ने अखिलेश-कांग्रेस पर साधा तीखा निशाना
- राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर केंद्र सरकार गंभीर, दोषी नहीं बचेंगे
- दिग्विजय सिंह ने मांगा दान वापस, गबन का लगाया आरोप
पटना – राम मंदिर चढ़ावा को लेकर छिड़े विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पटना में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लिया।
मंत्री ने इन नेताओं को खुलकर ‘नकली सनातनी’ करार दिया। उन्होंने आम जनता से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
उन्होंने कहा, “जिन दलों ने कभी भगवान राम के अस्तित्व को नहीं माना, वही आज खुद को रामभक्त बता रहे हैं।” गिरिराज सिंह ने आगे कहा कि इन्हीं दलों ने अदालत में रामसेतु के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे।
मंत्री के अनुसार, राम मंदिर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। इसकी भव्य प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हो चुकी है, जो जनवरी 2024 में अयोध्या में हुई थी।
गिरिराज सिंह ने कहा कि यह आस्था दुनिया भर के सनातनियों की रही है। उन्होंने दावा किया कि यह आस्था आगे भी बनी रहेगी।
चढ़ावा विवाद पर उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को गहरी ठेस पहुंची है। इस पर किसी तरह की दो राय नहीं हो सकती।
मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार इस मसले को पूरी गंभीरता से देख रही है। हालांकि, दोषी पाए जाने वालों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इसके साथ ही गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर 2027 के चुनाव को साधने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, कुछ नेता केवल वोट बैंक पर नजर टिकाए हुए हैं।
बहरहाल, यह पूरा मामला उस वक्त और गरमा गया जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया। कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने अयोध्या में मुकदमा दायर करने का ऐलान किया है।
उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अपने चंदे की वापसी की मांग रखी। दिग्विजय सिंह का आरोप है कि उस राशि में गबन हुआ है।
उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपए का दान दिया था। इसी वजह से उन्होंने उससे अधिक राशि देने का निर्णय लिया।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने कुल एक लाख ग्यारह हजार रुपए दान किए थे। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था।
पत्र में उन्होंने अनुरोध किया था कि यह राशि सीधे ट्रस्ट में जमा कराई जाए। इसके बाद उन्होंने खुद राशि जमा कर उसकी रसीद भी हासिल की थी।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, यह दान भगवान राम के प्रति आस्था से प्रेरित था। हालांकि, अब सामने आ रही शिकायतों ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है।
मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से ही चढ़ावे और दान की पारदर्शिता को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। इससे पहले भी कुछ दानपात्र संबंधी मामलों की जांच हो चुकी है।
वहीं, इस पूरे विवाद ने 2027 के चुनाव से पहले सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे पर एक-दूसरे को घेरने में जुटे हैं।
अयोध्या स्थित राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर दिन बड़ी संख्या में भक्त वहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
