August 28, 2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को पेश होगा यूसीसी विधेयक

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को पेश होगा यूसीसी विधेयक

उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद चौथा राज्य बनेगा बंगाल

मुख्य बिंदु:

  • पश्चिम बंगाल में यूसीसी विधेयक सोमवार को सदन में पेश होगा
  • सीएम सुवेंदु अधिकारी विधेयक पर चर्चा में लेंगे हिस्सा
  • सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी अलग विधेयक भी पेश होगा

कोलकाता – पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा। इस कदम के साथ ही राज्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा।

यह कानून धर्म, जाति या जनजाति के भेद के बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम तीन राज्य पहले से ही यूसीसी को अपना चुके हैं।

विधानसभा के एक सदस्य ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि विधेयक पेश करने का फैसला गुरुवार शाम लिया गया। यह बैठक अध्यक्ष रथेंद्र बोस द्वारा विधानसभा परिसर में बुलाई गई थी।

सूत्रों के अनुसार यह बैठक कुछ ही समय में संपन्न हो गई। सोमवार को सदन में कुल पांच विधेयक पेश किए जाने हैं, जिनमें यूसीसी विधेयक को सबसे अहम माना जा रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इन विधेयकों पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय तय किया गया है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं इस चर्चा में हिस्सा लेंगे।

इसके अलावा, विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी इस बहस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पुरानी प्रतिबद्धता से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी रैलियों में राज्य में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। हालांकि, सोमवार को सदन में एक और महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किया जाएगा।

इसका शीर्षक ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026’ रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य मकसद राज्य में असामाजिक गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण करना है।

यह प्रस्तावित कानून भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस 2023 के प्रावधानों से दो अहम मामलों में अलग है। पहला अंतर यह है कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्ति को इस कानून के लागू होने के बाद एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा।

दूसरी ओर, यह विधेयक राज्य सरकार को बीएनएस के संबंधित प्रावधानों के आधार पर ऐसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार भी देता है। इस तरह सोमवार का सत्र राज्य की कानूनी व्यवस्था में दो बड़े बदलावों का गवाह बन सकता है।

(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)

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