सिवान: बिहार के सिवान में वार्षिक धार्मिक शोभायात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने शोभायात्रा में 300 लोगों को शामिल होने की अनुमति देने की मांग खारिज करते हुए प्रशासन की ओर से लगाई गई मौजूदा पाबंदी को बरकरार रखा है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार मौलिक है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण या असीमित नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के हित में इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
300 श्रद्धालुओं को शामिल करने की थी मांग
मामला सिवान के एक स्थानीय मठ (अखाड़ा) की वार्षिक धार्मिक शोभायात्रा से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को आयोजित होने वाली शोभायात्रा को पारंपरिक मार्ग से कम से कम 300 श्रद्धालुओं के साथ निकालने की अनुमति दी जाए।
याचिका में कहा गया था कि पहले शोभायात्रा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 200 निर्धारित थी। बाद में 2014 में इसे घटाकर 150, 2015 में 100 और वर्ष 2023 के बाद महज पांच कर दिया गया। इसके साथ ही शोभायात्रा के पारंपरिक मार्ग में भी बदलाव किया गया।
अनुच्छेद 25 के तहत अधिकार का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। यह भी तर्क दिया गया कि पारंपरिक मार्ग पर शोभायात्रा निकालने से शांति भंग होने की कोई शिकायत पहले सामने नहीं आई थी।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि श्रद्धालुओं की संख्या और मार्ग को लेकर लगाए गए प्रतिबंध कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय हैं।
हाईकोर्ट ने पाबंदी को माना उचित
मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं, लेकिन ये अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से संबंधित उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं।
अदालत के फैसले के बाद शोभायात्रा से जुड़े लोगों में निराशा है। 300 श्रद्धालुओं के साथ पारंपरिक मार्ग से शोभायात्रा निकालने की मांग फिलहाल पूरी नहीं हो सकी है।