झारखंड पुलिस ने जारी की नई ‘मोस्ट वांटेड’ नक्सलियों की सूची

रांची : : वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड पुलिस ने भारी इनामी नक्सलियों की नई “मोस्ट वांटेड” सूची जारी की है। इस सूची के जरिए राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने जंगल और सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज कर दिया है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नई सूची में शामिल कई नक्सली दिवंगत शीर्ष माओवादी कमांडर मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ “किशनजी” के करीबी माने जाते हैं। किशनजी वर्ष 2011 में सुरक्षा बलों के एक अभियान में मारा गया था। सूची में शामिल ज्यादातर नक्सली पश्चिमी सिंहभूम, कोल्हान और सारंडा के जंगलों सहित अन्य प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।

बचे हुए माओवादी नेटवर्क पर फोकस

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सूची में शामिल कई उग्रवादी कोल्हान, सारंडा, पोड़ाहाट और झारखंड-ओडिशा-पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी प्रभाव को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इन नक्सलियों को घने जंगलों के भूगोल, गुरिल्ला युद्ध रणनीति और भूमिगत संचार नेटवर्क की गहरी जानकारी है, जिसे माओवादी गतिविधियों के चरम दौर में विकसित किया गया था।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के बचे हुए कमांड ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने के उद्देश्य से यह नई सूची जारी की गई है।

₹1 करोड़ तक का इनाम घोषित

राज्य सरकार ने सूचीबद्ध नक्सली नेताओं की गिरफ्तारी या मुठभेड़ में ढेर किए जाने की सूचना देने वालों के लिए ₹5 लाख से ₹1 करोड़ तक के नकद इनाम की घोषणा की है।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराज्यीय नक्सली गतिविधियों और संभावित ठिकानों पर नजर रखने के लिए पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय भी बढ़ा दिया है।

जंगल क्षेत्रों में संयुक्त अभियान तेज

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब झारखंड पुलिस और CRPF की CoBRA बटालियनें घने जंगलों में संयुक्त रूप से व्यापक एंटी-नक्सल अभियान चला रही हैं।

पिछले एक वर्ष के दौरान सुरक्षा बलों ने कई सफल अभियान चलाकर नक्सली ठिकानों से हथियार, विस्फोटक, डेटोनेटर और संचार उपकरण बरामद किए हैं।

सूत्रों के अनुसार, लगातार दबाव और अभियानों के कारण झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठनों की ताकत में काफी कमी आई है।

सारंडा और पोड़ाहाट बने प्रमुख केंद्र

अधिकारियों ने सारंडा वन क्षेत्र, पोड़ाहाट इलाका और पश्चिम सिंहभूम के सीमावर्ती कॉरिडोर को वर्तमान अभियानों का प्रमुख फोकस क्षेत्र बताया है।

इन संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि नक्सली संगठन दोबारा संगठित न हो सकें।

सरकार ने फिर दोहराई आत्मसमर्पण की अपील

सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ झारखंड सरकार ने सक्रिय माओवादी कैडरों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील दोहराई है।

अधिकारियों ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को राज्य की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, पुनर्वास सुविधा, बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

विकास को माना जा रहा स्थायी समाधान

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य और रणनीतिक अभियानों ने माओवादी नेटवर्क को काफी कमजोर जरूर किया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर प्रशासन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है।

अधिकारियों ने बताया कि जंगल और आदिवासी बहुल इलाकों में विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है ताकि उग्रवादी संगठन स्थानीय समुदायों के बीच दोबारा प्रभाव न बना सकें।

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