कोलकाता : पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान ईवीएम में हेराफेरी की गई, वोट लूटे गए और मतगणना केंद्रों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचला गया।
एक वीडियो संदेश जारी कर ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी शासन में पुलिस जनता की रक्षक नहीं बल्कि “शिकारी” बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई तथा महिलाओं पर हमले हुए।
ममता ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के बल पर लोकतंत्र को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि जब कल्याणी एक्सप्रेस सेतु परियोजना के दौरान 43 परिवार प्रभावित हुए थे, तब उनकी सरकार ने उन सभी के पुनर्वास की व्यवस्था की थी। अब उन्हीं इलाकों में हिंसा और डर का माहौल बनाया जा रहा है।
“संविधान बड़ा या बंदूक की नली?”
टीएमसी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने न्यायपालिका से भी हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि अदालतें ही कानून और संविधान की असली संरक्षक हैं।
ममता ने कहा, “मैं देखना चाहती हूं कि ज्यादा ताकत किसमें है—संविधान में या बंदूक की नली में।” उनके इस बयान को बीजेपी के खिलाफ सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
फाल्टा में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत
फाल्टा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को भारी अंतर से हराया। इस सीट पर बीजेपी को 1,09,021 वोटों की रिकॉर्ड बढ़त मिली, जिसे पश्चिम बंगाल में पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी जीत बताया जा रहा है। वहीं टीएमसी उम्मीदवार की जमानत भी जब्त हो गई।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन ही टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था, जिसके बाद मुकाबला पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में जाता दिखा।
शुभेंदु अधिकारी का पलटवार
फाल्टा में जीत के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में टीएमसी नेतृत्व को नोटा से भी मुकाबला करना पड़ेगा। बीजेपी की इस जीत को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
