11 से 15 जून ही नहीं, पूरे महीने दिखेगा आसमान में अद्भुत ‘प्लैनेट परेड’, जानें क्या है ‘एक्लिप्टिक’

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। जून का महीना इस बार खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास है। ग्रहों की ‘प्लैनेट परेड’ सिर्फ 11 से 15 जून के बीच ही नहीं बल्कि इस पूरे महीने दिखेगा। जून के महीने में आसमान में कई रोचक खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी, जो ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से भी खास है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, 11 से 15 जून के बीच सूर्यास्त के बाद आकाश में ग्रहों की सुंदर श्रृंखला दिखाई देगी, जिसमें बुध, शुक्र और बृहस्पति प्रमुख रहेंगे।

सबसे खास बात यह है कि 11 से 15 जून के बीच यह दृश्य और भी स्पष्ट होगा, जब बुध भी शुक्र और बृहस्पति के साथ जुड़कर एक छोटी लेकिन आकर्षक कतार बनाएगा। यह दृश्य सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज के पास देखा जा सकेगा।

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर लगभग एक ही काल्पनिक रास्ते पर घूमते हैं, जिसे ‘एक्लिप्टिक’ कहा जाता है। इसी कारण पृथ्वी से देखने पर ग्रह कभी-कभी आसमान के एक ही हिस्से में एक साथ दिखाई देते हैं, जिससे ऐसा लगता है जैसे वे एक कतार में खड़े हों।

इस दौरान शुक्र सबसे चमकीला ग्रह होगा, जिसे आसानी से पहचाना जा सकता है। वह बृहस्पति के पास दिखाई देगा, जिससे यह जोड़ी और भी आकर्षक लगेगी। वहीं, बुध ग्रह क्षितिज के बेहद करीब रहेगा, इसलिए उसे देखने के लिए साफ पश्चिमी आकाश और सही समय का ध्यान रखना जरूरी होगा।

नासा के अनुसार, जून महीने में केवल यह ग्रहों की परेड ही नहीं, बल्कि कई अन्य खगोलीय घटनाएं भी देखने को मिलेंगी। 9 जून के आसपास पहले ही शुक्र और बृहस्पति का बेहद नजदीकी मिलन (कंजंक्शन) दिखा, जिसमें दोनों ग्रह एक-दूसरे के बहुत करीब नजर आए।

अब 17 जून को एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिल सकती है, जब चंद्रमा शुक्र के सामने से गुजरता हुआ दिखाई देगा। इसे ‘लूनर ऑकल्टेशन’ कहा जाता है। इस दौरान कुछ स्थानों से देखने पर ऐसा लगेगा जैसे शुक्र कुछ समय के लिए चंद्रमा के पीछे छिप गया हो।

इसके अलावा 21 जून को ‘समर सोल्स्टिस’ यानी खगोलीय गर्मियों की शुरुआत होगी। यह दिन उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात लेकर आता है। इसी समय से आधिकारिक रूप से गर्मियों का मौसम खगोलीय रूप में शुरू माना जाता है।

जून का महीना रात के आकाश को और भी खास बनाता है क्योंकि इस दौरान ‘समर ट्रायंगल’ भी स्पष्ट दिखाई देने लगता है, जो वेगा, अल्टेयर और डेनेब जैसे चमकीले तारों से मिलकर बनता है। इसके आसपास कई डीप-स्काई ऑब्जेक्ट्स भी देखे जा सकते हैं, जो टेलीस्कोप से देखने पर बेहद आकर्षक लगते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूरे महीने आसमान में ग्रहों, चंद्रमा और तारों का यह संयोजन खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए एक सुनहरा अवसर है। हालांकि, बुध ग्रह को देखने के लिए खास सावधानी और सही दिशा का ध्यान रखना जरूरी होगा क्योंकि वह सूर्य के पास क्षितिज के बेहद नीचे रहेगा।

कुल मिलाकर, जून का महीना खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए बेहद रोमांचक रहने वाला है, खास बात है कि जून का महीना खगोल विज्ञान के शौकीनों के साथ-साथ ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी खास है। 11 से 15 जून के बीच आसमान में दिलचस्प खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा, शुक्र, गुरु और बुध ग्रह एक ही दिशा में एक-दूसरे के काफी करीब दिखाई देंगे।

ज्योतिष शास्त्र में इन तीनों ग्रहों को शुभ माना जाता है। गुरु ग्रह अति शुभ और ज्ञान, सौभाग्य के साथ उन्नति का प्रतीक है, शुक्र को प्रेम, भौतिक सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। वहीं, बुध ग्रह बुद्धिमत्ता, संवाद कौशल, शिक्षा और व्यापार से जुड़ा माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों शुभ ग्रहों का एक साथ दिखाई देना सभी यानी 12 राशियों पर किसी न किसी रूप में प्रभाव डाल सकता है। माना जा रहा है कि कुछ राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। इस दौरान करियर, कारोबार, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इसका प्रभाव हर व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

एमटीडीकेपी

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