रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। उम्र संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह लंबे समय से बीमार थीं। उनका इलाज चल रहा था।
एम्स रायपुर के चिकित्सकों के अनुसार, डॉ. तीजन बाई ने रविवार सुबह करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के सांस्कृतिक जगत और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। कला और संस्कृति से जुड़े अनेक लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गनियारी गांव से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक का सफर
दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और संघर्ष के बल पर पंडवानी लोकगायन को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और विशिष्ट प्रस्तुति शैली के माध्यम से महाभारत की कथाओं को इस तरह मंच पर जीवंत किया कि पंडवानी भारत की सीमाओं से निकलकर दुनिया के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों तक पहुंच गई।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। जापान, फ्रांस समेत अनेक देशों में उनके कार्यक्रमों को व्यापक सराहना मिली।
पद्मश्री से पद्म विभूषण तक मिला सम्मान
भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 1987 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका कला पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।
डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति और पंडवानी परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी आवाज, कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
तीजनबाई के निधन पर सरयू ने शोक जताया

जमशेदपुर। ख्यातिलब्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई के निधन पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
अपने शोक संदेश में सरयू राय ने कहा कि पंडवानी गायिकी को तीजनबाई ने देश-दुनिया में लोकप्रिय बनाया। उन्होंने अपने वर्षों की मेहनत से अनेक पंडवानी गायक-गायिका तैयार किये जो आज भी पंडवानी गायन कर रहे हैं और इस कला को बचाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 2022 में रांची में आयोजित ‘पर्यावरण मेला’ में तीजनबाई का कार्यक्रम हुआ था, जिसने आम जनमानस में गहरा प्रभाव छोड़ा था। उनके निधन से गायिकी की पंडवानी विधा में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है जिसे भरा जाना संभव नहीं।
गौरतलब है कि तीजनबाई को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से 1995 में सम्मानित किया जा चुका था।