रांची: झारखंड की दो राज्ससभा सीटों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के बीच सत्तारूढ़ महागठबंधन के अन्दर खाने में सियासी खींचतान का दौर जारी है। तमिलनाडु के बाद क्या झारखंड में भी टूटेगा गठबंधन? झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। चुनाव से पहले ही महागठबंधन में बढ़ी तकरार।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस द्वारा एकतरफा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने दोनों राज्यसभा सीटों पर अपना दावा ठोकते हुए चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने गठबंधन की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है और कांग्रेस की रणनीति को बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर जेएमएम विधायक दल और पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मौजूद नेताओं ने सर्वसम्मति से दोनों सीटों पर पार्टी उम्मीदवार उतारने की वकालत की।
उम्मीदवार तय करने का अधिकार हेमंत सोरेन को
बैठक के बाद मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पार्टी नेताओं और विधायकों की राय थी कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर जेएमएम को चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि पार्टी की परंपरा के अनुसार उम्मीदवारों के चयन का अंतिम अधिकार पार्टी अध्यक्ष को दिया जाता है। इसी परंपरा के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है।
उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अपने उम्मीदवारों के नाम का औपचारिक ऐलान जल्द कर सकती है।
महागठबंधन की ताकत
JMM – 34 विधायक
कांग्रेस – 16 विधायक
RJD – 4 विधायक
CPI(ML) – 2 विधायक
कुल – 56 विधायक
कांग्रेस पर विश्वास में नहीं लेने का गंभीर आरोप
जेएमएम विधायक और पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने कांग्रेस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में प्रणव झा के नाम की घोषणा से पहले जेएमएम से कोई औपचारिक चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि विधानसभा में संख्या बल और राजनीतिक परिस्थिति को देखते हुए दोनों सीटों पर जेएमएम की स्वाभाविक दावेदारी बनती है।
बैजनाथ राम ने कहा कि बैठक में शामिल सभी नेताओं ने एकमत से दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की सलाह दी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
प्रणव झा पर दांव खेल चुकी कांग्रेस
कांग्रेस पहले ही राज्यसभा चुनाव के लिए युवा नेता प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि गठबंधन सहयोगी दलों की सहमति मिल जाएगी, लेकिन जेएमएम के ताजा रुख ने समीकरण बदल दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री Hemant Soren से बातचीत की थी, लेकिन फिलहाल जेएमएम अपने रुख पर कायम नजर आ रही है।
गठबंधन टूटने की नहीं, दबाव की राजनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेएमएम का यह कदम केवल राज्यसभा सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर अपनी राजनीतिक ताकत और निर्णायक भूमिका का संदेश देने की रणनीति भी हो सकती है। इससे राज्य की राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया है।
हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Alamgir Alam ने स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और दोनों सीटों पर गठबंधन समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से जल्द ही कोई सर्वमान्य समाधान निकल आएगा।
कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच लगातार बढ़ रही तल्खी फिलहाल झारखंड की राजनीति में सुर्खियों में है। अब सियासी गलियारे में सबकी नजरें हेमंत सोरेन के निर्णय और झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा घोषित किए जाने वाले उम्मीदवारों पर टिकी है।
