- बिष्टुपुर के सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अजामिल उद्धार, प्रह्लाद चरित्र और नरसिंह अवतार की महिमा का हुआ वर्णन
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को कथा वाचक भागवत-भूषण परम पूज्य सीताराम शास्त्री ने अजामिल उद्धार, भक्त प्रह्लाद चरित्र एवं भगवान नरसिंह अवतार के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से लिया गया प्रभु का नाम घोर से घोर पापों का भी नाश करने की शक्ति रखता है।कथावाचक ने कहा कि भागवत की कथाएं ईश्वर की असीम कृपा, क्षमा और अनन्य भक्ति की महिमा का संदेश देती हैं।

उन्होंने बताया कि ध्रुव ने तपस्या के बल पर, जड़ भरत ने वैराग्य के माध्यम से और भक्त प्रह्लाद ने अटूट श्रद्धा व भक्ति के जरिए मोक्ष प्राप्त किया, जबकि अजामिल ने जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान का नाम स्मरण कर अपना उद्धार किया। ये सभी प्रसंग धर्म, सत्य और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास की प्रेरणा देते हैं।प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए सीताराम शास्त्री ने कहा कि हिरण्यकशिपु द्वारा दी गई अनेक यातनाओं के बावजूद प्रह्लाद की भक्ति कभी विचलित नहीं हुई।
अंततः भगवान नरसिंह खंभे से प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु का वध कर अपने भक्त की रक्षा की। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची भक्ति करने वालों के संरक्षण के लिए भगवान स्वयं अवतरित होते हैं।उन्होंने अजामिल की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत पुराण की यह कथा इस सत्य को स्थापित करती है कि भगवान के नाम का स्मरण किसी भी पापी व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग प्रदान कर सकता है। वहीं ध्रुव चरित्र की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव ने कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और ध्रुव तारे के रूप में अमर स्थान प्राप्त किया। ध्रुव की कथा अटूट निष्ठा, समर्पण और एकाग्रता का प्रतीक है।कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।आज होंगे वामन अवतार, राम जन्म और कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगकथा के चौथे दिन शनिवार को भगवान वामन अवतार, प्रभु श्रीराम जन्म तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सहित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी। सात दिवसीय इस धार्मिक आयोजन का संचालन सामाजिक एवं धार्मिक संस्था सोनारी भजन संध्या की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। कथा का शुभारंभ 3 जून को हुआ था और इसका समापन 9 जून को होगा।शुक्रवार को यजमान के रूप में निर्मला-श्रवण अग्रवाल, सरिता-संजय अग्रवाल, रजनी मित्तल, बीना-संतोष अग्रवाल, मंजू-अजय मुसद्दी, बीना-मनोज शर्मा तथा कृष्णा-राजेंद्र अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
