लखनऊ : इन्फ्लुएंसर की संदिग्ध परिस्थिति में मौत, पति सहित ससुराल के लोगों पर दहेज हत्या का आरोप

लखनऊ, 1 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने ससुराल में एक युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतका के परिजनों ने पति और उसके परिवार के कई सदस्यों पर अपराध की साजिश रचने और आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

कानपुर की मूल निवासी मानसी ने 2024 में सागर राजपूत से शादी की थी। एफआईआर के अनुसार, मानसी और उनके पति दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थे।

एनडीटीवी के अनुसार, मानसी के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि शादी के दौरान बड़ी मात्रा में नकद राशि, घरेलू सामान और उपहार दिए गए थे। इसके बावजूद दूल्हे सागर का परिवार संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त दहेज की मांग करता रहा, जिसमें कार की मांग भी शामिल थी।

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, मानसी को शादी के तुरंत बाद दहेज के मुद्दे पर बार-बार ताने और अपमान का सामना करना पड़ा। जब ससुरालियों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो मानसी को भावनात्मक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

परिवार ने बताया कि मानसी ने उन्हें कई बार अपने ससुराल में हो रही परेशानियों के बारे में बताया था। इसके जवाब में रिश्तेदारों ने विवाद सुलझाने और दोनों परिवारों के बीच शांति बहाल करने के प्रयास में कई बार लखनऊ गए थे।

दअरसल, शनिवार को मानसी के परिवार को उसकी मृत्यु की सूचना मिली। हालांकि शुरू में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था, लेकिन उसके रिश्तेदारों ने इस बात का पुरजोर खंडन करते हुए आरोप लगाया कि उसकी हत्या की गई थी और बाद में शव को आत्महत्या जैसा दिखाने के लिए रखा गया था।

पीड़िता के परिवार द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके पति के परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया है। एफआईआर में पति सागर राजपूत, ससुर राजेश, देवर अनु, ननद बरखा और चांदनी, और बुआ आशा को आरोपी बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राजपूत से फिलहाल पूछताछ की जा रही है और मौत के हालात का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।

राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में दहेज से संबंधित 5,737 मौतें दर्ज की गईं, यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 16 मौतें हुईं।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, जहां दहेज से संबंधित 2,038 मौतें हुईं, इसके बाद बिहार में 1,078 मामले दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में भी अच्छी संख्या में मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े मौजूदा कानूनी सुरक्षा उपायों के बावजूद दहेज से संबंधित अपराधों को रोकने में आने वाली चुनौतियों को उजागर करते हैं।

ओपीएएस

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