अजमेर कोर्ट ने अफीम तस्करी मामले में दोषी को 10 साल की सजा सुनाई

अजमेर, 12 जून (आईएएनएस)। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को बड़ी सफलता मिली है। एनसीबी की जयपुर जोनल यूनिट की ओर से दर्ज किए गए अंतरराज्यीय अफीम तस्करी के एक मामले में अजमेर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) अजमेर भानुकुमार ने जावरीलाल पुत्र साहिराम, निवासी डांगियावास, जोधपुर (राजस्थान) को दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई। यह मामला एनसीबी जोधपुर द्वारा अजमेर में दर्ज किया गया था।

जानकारी के अनुसार, 18 मई 2020 को एनसीबी को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रक संख्या आरजे-19 जीसी 0501 में अवैध रूप से अफीम की खेप ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए एनसीबी की टीम ने अजमेर स्थित गेगल टोल प्लाजा के पास नाकाबंदी की।

19 मई 2020 को संदिग्ध ट्रक की तलाशी के दौरान ईंधन टैंक के पास बनाए गए एक विशेष गुप्त खांचे का पता चला। इस खांचे से 22 पैकेट बरामद किए गए, जिनमें कुल 40.850 किलोग्राम अफीम छिपाकर रखी गई थी। जांच में सामने आया कि यह अवैध अफीम बिहार के शेरघाटी क्षेत्र से लाई गई थी और इसे राजस्थान के पाली ले जाया जा रहा था।

अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी व्यक्ति उक्त ट्रक का मालिक भी था, जिसे बाद में एमएसटीसी के माध्यम से नीलाम कर दिया गया।

एनसीबी ने कहा कि यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि देश में मादक पदार्थों की तस्करी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जयपुर जोनल यूनिट द्वारा प्रभावी जांच और मजबूत अभियोजन के चलते दोषी को सजा दिलाई जा सकी, जिससे समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

एनसीबी ने दोहराया कि वह नशा मुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान के तहत ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। साथ ही, आम जनता से भी इस लड़ाई में सहयोग की अपील की गई है।

एनसीबी ने कहा कि मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन या अवैध कारोबार से जुड़ी किसी भी सूचना को मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1933 पर साझा किया जा सकता है। एनसीबी के अनुसार, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

पीएसके

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