August 6, 2026
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जमशेदपुर

कोल्हान में हाथियों का कहर जारी: चांडिल में महिला की मौत, चाकुलिया में बुजुर्ग घायल

कोल्हान में हाथियों का कहर जारी: चांडिल में महिला की मौत, चाकुलिया में बुजुर्ग घायल

जमशेदपुर/सरायकेला : वन विभाग हाथियों से हमले की रोकथाम की घोषणाएं कर रहा है लेकिन इस समस्या से कम से कम फिलहाल तो निजात मिलना संभव नहीं है।

कोल्हान क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक बरकरार है। शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी।

एक घटना में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरी घटना में एक बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत लावा कुटाम के वनडीह टोला में गुरुवार देर रात एक जंगली हाथी गांव में घुस आया। उस समय चम्पा मुंडा अपने घर में सो रही थीं।

हाथी ने उनके घर को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे परिवार के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए सभी लोग घर से बाहर निकल गए, लेकिन चम्पा मुंडा हाथी की चपेट में आ गईं। हाथी ने उन्हें उठाकर पटक दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। शुक्रवार सुबह वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

वहीं, पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड की जमुआ पंचायत स्थित इंदबनी गांव के पास भी हाथी के हमले की घटना हुई।

काबुल मुंडा (60) शुक्रवार सुबह पैदल जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर अचानक एक हाथी पर पड़ गई। हाथी ने उन पर हमला कर दिया और पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और वन विभाग की मदद से घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम रेफर कर दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार इंदबनी जंगल क्षेत्र में तीन हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से डेरा जमाए हुए है। इसके कारण आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्र के लोगों में हाथियों को लेकर चिंता और दहशत बढ़ती जा रही है। वन विभाग की योजनाओं का कुछ वर्षों के बाद संभवत: लाभ मिले, तब तक घटनाएं होती रहेंगी।

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वर्षों बाद मिलेगा वन विभाग की योजना का लाभ

जमशेदपुर। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में जमशेदपुर वन प्रमंडल ने इस वर्ष एक नई और महत्वपूर्ण पहल की है।

धालभूम वन प्रमंडल की बात करें तो इस मानसून सत्र में लगाए जाएंगे छह लाख पौधे। इस योजना के तहत हाथियों के पसंदीदा पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। मकसद भोजन की तलाश में हाथियों को भटकना नहीं पड़ेगा।

वन विभाग की यह योजना तुरंत तो नहीं लेकिन दीर्घकालिक और प्रभावी होगा। विभाग का मानना है कि भोजना की तलाश में हाथी गांव की ओर आते हैं और इसी दौरान कोई न कोई हादसा हो जाता है। उनके पसंदीदा पौधों की बात करें तो उनमें जामुन, कटहल, आम, बांस और बरगद शामिल है।

वन विभाग का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष के समाधान की दिशा में एक दीर्घकालिक और प्रभावी कदम साबित होगी।जमशेदपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी सबा आलम अंसारी ने बताया कि दलमा और आसपास के वन क्षेत्रों में अक्सर हाथियों के गांवों में प्रवेश करने की घटनाएं सामने आती हैं।

हाथियों की पसंद के पौधों को मिलेगी प्राथमिकता

वन विभाग के अनुसार इस वर्ष बांस, बरगद, पीपल, जामुन, कटहल, आम और अन्य फलदार एवं छायादार प्रजातियों के पौधे बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे। ये पौधे हाथियों के प्राकृतिक भोजन का हिस्सा हैं। आने वाले वर्षों में जब ये पौधे विकसित होंगे तो जंगलों के भीतर ही हाथियों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो सकेगा। उद्​देश्य यह है कि ये पौधे पक्षियों, बंदरों, हिरणों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी उपयोगी होंगे।

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