September 10, 2026
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कांग्रेस ने नामांकन रद्द होने को ‘सीट की चोरी’ बताया, भाजपा और आयोग पर मिलीभगत का आरोप

कांग्रेस ने नामांकन रद्द होने को ‘सीट की चोरी’ बताया, भाजपा और आयोग पर मिलीभगत का आरोप

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस ने शुक्रवार को भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने में दोनों की मिलीभगत थी।

कांग्रेस पार्टी ने एक बयान में दावा किया कि मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास राज्यसभा की तीसरी सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या नहीं थी, इसलिए उसने अपने विरोधी उम्मीदवार को मुकाबले से बाहर करने के लिए “गलत हथकंडे” अपनाए।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का नॉमिनेशन “गलत और बेबुनियाद आधार” पर खारिज कर दिया, क्योंकि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी।

कांग्रेस के मुताबिक, नटराजन के खिलाफ अभी कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ किसी अपराध का संज्ञान नहीं लिया है। पार्टी का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस कानूनी नोटिस का जिक्र किया, वह सिर्फ एक निजी शिकायत से जुड़ा था और उसे नॉमिनेशन पेपर्स के फॉर्म 26 के तहत जानकारी देने की ज़रूरत वाला लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस ने तर्क दिया कि फॉर्म 26 के तहत उम्मीदवारों को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें आरोप तय किए गए हों या अदालत ने किसी अपराध का संज्ञान लिया हो। चूंकि नटराजन के मामले में इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं हुई थी, इसलिए हलफनामे के संबंधित हिस्से में उनका “लागू नहीं” वाला जवाब कानूनी रूप से सही था।

रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने दावा किया कि अधिकारी ने गलत तरीके से कहा कि अदालत ने कथित अपराध का संज्ञान लिया था। पार्टी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल सुनवाई का मौका देने के लिए नोटिस जारी किया था, न कि आपराधिक कार्रवाई शुरू की थी।

विपक्षी पार्टी ने चुनाव आयोग पर “दोहरे मापदंड” अपनाने का भी आरोप लगाया, क्योंकि उसने झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवानी के नामांकन के मामले में अलग रवैया अपनाया था।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नथवानी के नॉमिनेशन पेपर में कई कमियां थीं, जैसे हलफनामे में दिए गए नाम में अंतर, फॉर्म 26 में अधूरी जानकारी और संपत्ति व टैक्स की जानकारी देने में चूक। इन कमियों के बावजूद झारखंड में रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्टीकरण की अनुमति दी और नॉमिनेशन स्वीकार कर लिया।

प्रह्लाददास खंडेलवाल बनाम नरेंद्र कुमार साल्वे (1973) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कांग्रेस ने तर्क दिया कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास यह अधिकार नहीं है कि वे उम्मीदवारों को जांच-पड़ताल के दौरान बड़ी कमियों को ठीक करने की अनुमति दें।

कांग्रेस पार्टी ने कहा, “सीट चोरी के इस ताजा मामले में बीजेपी और चुनाव आयोग अपराध में भागीदार हैं।”

ओपीपीएम

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