August 10, 2026
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झारखंड से आमों का निर्यात शुरू, पहली खेप यूनाइटेड किंगडम भेजी गई

झारखंड से आमों का निर्यात शुरू, पहली खेप यूनाइटेड किंगडम भेजी गई

नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। केंद्र सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास कर रही है। इसी क्रम झारखंड राज्य के आमों का निर्यात शुरू किया गया है और पहली खेप को यूनाइटेड किंगडम भेजा गया है। यह जानकारी वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से रविवार को दी गई।

इसे स्थानीय सामान के विदेशों में जाने का शानदार उदाहरण बताते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम पहुंचने वाले हैं। एपीडा के निरंतर प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिलाओं को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने राज्य से यूनाइटेड किंगडम के लिए ताजे आमों की पहली वाणिज्यिक खेप को हरी झंडी दिखाकर 4 जून 2026 को कोलकाता से रवाना किया।

मंत्रालय ने बताया कि इस खेप में झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो ब्लॉक में स्थित महिला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त 1.5 मीट्रिक टन ताजे आम्रपाली आम है। इस खेप का निर्यात कोलकाता स्थित मैसर्स जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लंदन, यूनाइटेड किंगडम को किया जा रहा है।

यह निर्यात, सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रगतिशील किसानों के लिए एपीडा द्वारा 5 मई, 2026 को आयोजित निर्यात-उन्मुख क्षमता विकास कार्यक्रम के बाद किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निर्यात संबंधी आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और बाजार के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना था।

मंत्रालय के मुताबिक, इसके बाद, एपीडा ने जिले से निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले आमों की खरीद के लिए बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और मैसर्स जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच संपर्क स्थापित करने में सहायता की। वर्तमान खेप इसी पहल का परिणाम है।

सरकार ने आगे कहा कि इस पहल से क्षेत्र के किसान समूहों के बीच गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन करने को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

एबीएस

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