जमशेदपुर। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एटीएम की सुरक्षा में वर्षों से तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स को नई सुरक्षा एजेंसी सीआईएसएस (CISS) द्वारा अचानक नौकरी से हटाए जाने का मामला सामने आया है। प्रभावित गार्ड्स का दावा है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए कार्यमुक्त कर दिया गया। इस फैसले से 100 से अधिक सुरक्षा कर्मियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
रविवार को नौकरी से निकाले गए सुरक्षा गार्ड्स जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मिलने पहुंचे। उनके साथ विधायक के असंगठित क्षेत्र मजदूर प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि अमित शर्मा भी मौजूद थे। गार्ड्स ने विधायक को अपनी समस्याओं और रोजगार छिन जाने से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों से अवगत कराया।
सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि उनमें से कई लोग पिछले 10 वर्षों या उससे अधिक समय से एसबीआई के विभिन्न एटीएम केंद्रों की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे थे। लंबे समय से सेवा देने के बावजूद नई एजेंसी के आने के बाद उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
विधायक सरयू राय ने प्रभावित कर्मियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह इस मामले में संबंधित सुरक्षा एजेंसी और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों से बातचीत करेंगे तथा पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है तो उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
असंगठित क्षेत्र मजदूर प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि अमित शर्मा ने बताया कि विधायक सोमवार को सीआईएसएस एजेंसी के प्रतिनिधि दीपक से इस संबंध में बातचीत करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियां बदलती रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं की जाती थी। उनका कहना है कि सीआईएसएस के आने के बाद पुराने और अनुभवी सुरक्षा कर्मियों को हटाकर कम वेतन पर नए लोगों की नियुक्ति की जा रही है।
अमित शर्मा ने एक भावुक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक महिला सुरक्षा गार्ड के पति की हाल ही में मृत्यु हो गई। उनके अनुसार, वह इस बात को लेकर लगातार मानसिक तनाव में थे कि अन्य कर्मचारियों की तरह कहीं उनकी पत्नी की नौकरी भी न चली जाए।
अमित शर्मा ने दावा किया कि अत्यधिक तनाव और सदमे के कारण ही उनकी मृत्यु हुई। हालांकि इस संबंध में किसी चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
सुरक्षा गार्ड्स ने मांग की है कि उनकी सेवाओं को बहाल किया जाए और लंबे समय से कार्यरत कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। वहीं, अब सभी की निगाहें विधायक और संबंधित एजेंसी के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।
वैसे पिछले कई दिनों से प्रभावित लोगों ने धरना प्रदर्शन किया। नारेबाजी की लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। आखिरकार वे लोग जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मिले और परेशानी बताई। उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे अपने स्तर से प्रयास करेंगे।
