जमशेदपुर : महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की एक नई शिकायत सामने आने के बाद छात्र सुरक्षा और छात्रावास अनुशासन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रथम वर्ष के एक एमबीबीएस छात्र ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के समक्ष ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर वरिष्ठ छात्रों पर मानसिक प्रताड़ना और छात्रावास कक्ष आवंटन में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएमसी ने कॉलेज प्रशासन से आरोपों और इस संबंध में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मानसिक प्रताड़ना और हॉस्टल में दबाव का आरोप
शिकायत के अनुसार छात्र ने आरोप लगाया है कि कुछ वरिष्ठ छात्रों ने हॉस्टल परिसर में उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। छात्र का कहना है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा आवंटित कमरे के बजाय उसे वरिष्ठ छात्रों की पसंद के कमरे में रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
इन आरोपों ने मेडिकल कॉलेज में लागू एंटी-रैगिंग व्यवस्था और हॉस्टल प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन और पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद जमशेदपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अर्नव मिश्रा और पटमदा डीएसपी दयानंद कुमार ने इस सप्ताह एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर और छात्रावास का दौरा किया। अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया के तहत निरीक्षण किया और सीसीटीवी फुटेज की भी समीक्षा की।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर आरोपों की सत्यता और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटा है।
एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच तेज
कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने भी मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शनिवार को समिति के सदस्यों ने कई वरिष्ठ छात्रों से पूछताछ की और शिकायत से संबंधित जानकारी एकत्र की।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ की जा रही है ताकि किसी भी छात्र को अनावश्यक परेशानी न हो। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में अभी तक आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाएगा।
एमजीएम में पहले भी लग चुके हैं रैगिंग के आरोप
यह पहली बार नहीं है जब एमजीएम मेडिकल कॉलेज रैगिंग के आरोपों को लेकर चर्चा में आया हो।
3 जुलाई 2024 को छात्रों ने शिकायत की थी कि कुछ वरिष्ठ छात्रों ने हॉस्टल में देर रात तक शोर-शराबा, तेज संगीत, कथित नशाखोरी और अनुचित व्यवहार के जरिए भय का माहौल बना रखा था। शिकायत में उत्पीड़न और दबाव बनाने के आरोप भी शामिल थे।
इसके बाद 26 सितंबर 2024 को जूनियर छात्रों ने रैगिंग से संबंधित शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को सौंपी थी।
वहीं 14 जनवरी 2024 को रैगिंग के एक मामले में तीन छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
एनएमसी द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने और कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच जारी रहने के बीच अब सभी की नजर जांच के निष्कर्ष पर टिकी है। छात्र और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि संस्थान परिसर में सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
कॉलेज प्रशासन ने दोहराया है कि एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और यदि किसी भी प्रकार का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
