August 10, 2026
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एनआईटी जमशेदपुर में पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन प्रोग्राम, छात्र कल्याण व आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर जोर

एनआईटी जमशेदपुर में पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन प्रोग्राम, छात्र कल्याण व आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर जोर

जमशेदपुर : National Institute of Technology Jamshedpur में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप शिक्षकों की क्षमता वृद्धि और छात्र सहायता तंत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है।

संस्थान के निदेशक Prof. Goutam Sutradhar के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को छात्र परामर्श, मनोसामाजिक कल्याण, काउंसलिंग सहायता प्रणाली, परिणाम आधारित शिक्षा (ओबीई) तथा समावेशी शैक्षणिक प्रक्रियाओं के क्षेत्र में और अधिक सक्षम बनाना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की बदलती शैक्षणिक एवं भावनात्मक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने और उनका समाधान करने की दिशा में पहल की जा रही है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र “छात्रों के सामने मौजूद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बाधाओं की पहचान” विषय पर केंद्रित था। इस सत्र को Vishnu Suresh ने संबोधित किया, जो Central Institute of Psychiatry (सीआईपी), रांची में मनोरोग सामाजिक कार्य प्रशिक्षक हैं।

सत्र में छात्रों के शैक्षणिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक, व्यवहारिक और सामाजिक-पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को विद्यार्थियों की समस्याओं की शुरुआती पहचान, मनोसामाजिक हस्तक्षेप की रणनीतियों तथा वैज्ञानिक आधार पर विकसित मेंटरिंग पद्धतियों की जानकारी दी गई। साथ ही, शिक्षकों की भूमिका को सुरक्षित, संवेदनशील और समावेशी शिक्षण वातावरण तैयार करने के संदर्भ में रेखांकित किया गया।

दूसरा सत्र “आउटकम बेस्ड एजुकेशन और एक्टिव पेडागॉजी” विषय पर आयोजित हुआ, जिसे कोलकाता की शिक्षाविद एवं मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ N. T. Rupa ने संबोधित किया।

अपने व्याख्यान में उन्होंने परिणाम आधारित शिक्षा (ओबीई) ढांचे को छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ती है और सीखने के परिणाम बेहतर होते हैं।

सत्र के दौरान पाठ्यक्रम परिणामों के प्रभावी समन्वय, दक्षता मानचित्रण, सहयोगात्मक शिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षा, सतत मूल्यांकन और शिक्षण-प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

इसके अलावा, प्रतिभागियों ने आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान क्षमता और कक्षा में सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देने वाली नवीन शिक्षण तकनीकों की भी जानकारी प्राप्त की।

अपग्रेडेशन कार्यक्रम को छात्रों ने सराहा और कहा कि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से संस्थान छात्र लाभान्वित होंगे।

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