बांग्ला अकादमी गठन और प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बंगला पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग उठेगी
मुख्य बिंदु:
- 7 अगस्त को कुटे मैदान में होगा एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना
- बंगला अकादमी गठन और शिक्षा संरक्षण की प्रमुख मांग
- राज्यभर के विद्यार्थियों और संगठनों से शामिल होने की अपील
रांची/जमशेदपुर – झारखंड में बंगला भाषा की शिक्षा के संरक्षण, बांग्ला अकादमी की स्थापना और प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बंगला पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा के समक्ष कुटे मैदान में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड बांग्ला-भाषी उन्नयन समिति ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी बांग्ला अकादमी का गठन नहीं हो सका है। समिति के अनुसार इससे बंगला भाषा की शिक्षा का ढांचा लगातार कमजोर हुआ है।
समिति ने बताया कि हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में बंगला विभागों को बंद करने अथवा पढ़ाई सीमित करने के निर्णय से बंगाली भाषी समाज में चिंता बढ़ी है।
समिति का कहना है कि राज्य गठन से पहले विद्यार्थियों को प्राथमिक स्तर से स्नातकोत्तर तक बंगला भाषा में शिक्षा का अवसर मिलता था। हालांकि, राज्य गठन के बाद से इस भाषा की शिक्षा लगातार उपेक्षा का शिकार हुई है।
समिति ने बताया कि पिछले 26 वर्षों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रियों और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन और आवेदन सौंपे गए। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
समिति के अनुसार, पूर्व में हुए सरकारी सर्वेक्षण में भी घरेलू स्तर पर बंगाली भाषा बोलने वाले विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने का उल्लेख किया गया था। वहीं, वर्तमान में बंगला भाषा की शिक्षा समाप्ति के कगार पर पहुंचने की स्थिति चिंताजनक बताई गई।
समिति ने कहा कि 7 अगस्त को होने वाले धरना-प्रदर्शन के माध्यम से राज्य सरकार का ध्यान बंगला भाषा की शिक्षा के संरक्षण, बांग्ला अकादमी की स्थापना तथा प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक पढ़ाई सुनिश्चित करने की मांग की ओर आकर्षित किया जाएगा।
इसके अलावा, कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से विद्यार्थी, समिति के सदस्य और बंगाली भाषा के प्रति जागरूक नागरिक शामिल होंगे।
वहीं, समिति ने सभी बंगाली संगठनों, शिक्षकों, साहित्यकारों, लेखकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से शांतिपूर्ण जन-आंदोलन में भाग लेकर बंगला भाषा के शैक्षणिक एवं संवैधानिक अधिकारों के समर्थन की अपील की है।