जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित नवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जापान के काकामिगाहारा में आयोजित मेंस अंडर-18 एशिया कप 2026 में अकादमी के दो प्रतिभाशाली कैडेट आशीष तानी पूर्ति और प्रेमचंद सोय ने भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
फाइनल मुकाबले में भारत ने मेजबान जापान को 4-1 से हराकर एशियाई चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।
इस उपलब्धि के साथ एनटीएचए ने एक बार फिर खुद को भारतीय हॉकी के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
अकादमी के दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के अपराजित अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
टूर्नामेंट के सबसे बड़े आकर्षण के रूप में उभरे आशीष तानी पूर्ति ने अपने बेहतरीन ड्रैग-फ्लिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए 13 गोल दागे और प्रतियोगिता के शीर्ष स्कोरर बने। उन्होंने दबाव वाले मुकाबलों में असाधारण खेल दिखाया।
सेमीफाइनल और फाइनल दोनों में लगातार हैट्रिक जमाकर उन्होंने भारतीय टीम की जीत की राह आसान की। जापान के खिलाफ फाइनल में आशीष ने दूसरे, 28वें और 34वें मिनट में गोल कर टीम को मजबूती प्रदान की। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फाइनल का ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया।
वहीं, भारतीय मिडफील्ड की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रेमचंद सोय ने अपनी तेज गति, सटीक नियंत्रण और बेहतरीन खेल समझ का परिचय दिया। उन्होंने लगातार आक्रमण तैयार किए और विपक्षी रक्षा पंक्ति को भेदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चीनी ताइपे के खिलाफ उनका महत्वपूर्ण फील्ड गोल भी भारत की सफलता का अहम हिस्सा रहा। पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम को बढ़त बनाए रखने में मदद की।
इस ऐतिहासिक सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए एनटीएचए के प्रोजेक्ट डायरेक्टर गुरमीत सिंह राव ने कहा कि यह नवल टाटा हॉकी अकादमी और पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है।
उन्होंने कहा कि आशीष और प्रेमचंद को केवल भारतीय टीम का हिस्सा ही नहीं, बल्कि बड़े मुकाबलों में मैच का रुख बदलते देखना अकादमी की प्रशिक्षण प्रणाली की सफलता का प्रमाण है।
कहा कि चयन के समय ही दोनों खिलाड़ियों की प्रतिभा पर भरोसा था और आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्हें शीर्ष प्रदर्शन करते देखना बेहद संतोषजनक है। राव ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि एनटीएचए की उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था विश्वस्तरीय हॉकी खिलाड़ी तैयार करने में सक्षम है।

