September 11, 2026
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विश्व दुग्ध दिवस 2026: सरकारी योजनाओं से मजबूत हुआ डेयरी सेक्टर, बढ़ी किसानों की आय और महिला भागीदारी

विश्व दुग्ध दिवस 2026: सरकारी योजनाओं से मजबूत हुआ डेयरी सेक्टर, बढ़ी किसानों की आय और महिला भागीदारी

पटना, 1 जून (आईएएनएस)। विश्व दुग्ध दिवस 2026 के अवसर पर बिहार में डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों और संभावनाओं को लेकर सोमवार को विशेष चर्चा हुई। इस दौरान बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कंफेड) के अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी शीर्षत कपिल अशोक और पशुपालकों से आईएएनएस ने खास बातचीत की।

शीर्षत कपिल अशोक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के प्रभाव से डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। इन योजनाओं का सीधा लाभ पशुपालकों तक पहुंचा है, जिससे दूध उत्पादन, ग्रामीण आय और महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।”

उन्होंने बताया, “पिछले कुछ वर्षों में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पहले कई क्षेत्रों में गायों का दूध उत्पादन काफी कम था, लेकिन अब उन्नत नस्लों और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों के प्रसार से स्थिति में बड़ा सुधार आया है। हाइब्रिड जर्सी, होल्स्टीन फ्रिजियन के साथ-साथ साहीवाल, गिर और रेड सिंधी जैसी देशी नस्लों को बढ़ावा देने के प्रयास सफल रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत में डेयरी सहकारिता आंदोलन की मजबूत नींव ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम से पड़ी थी। गुजरात के आनंद से शुरू हुए इस मॉडल ने देशभर में डेयरी सहकारी समितियों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। इसी क्रम में बिहार में सुधा, कर्नाटक में नंदिनी, पंजाब में वेरका, हरियाणा में वीटा, उत्तर प्रदेश में पराग और झारखंड में मेघा जैसे ब्रांड विकसित हुए, जिन्होंने किसानों को बाजार से जोड़ने और बेहतर मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम में मौजूद पशुपालकों ने भी सरकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया। पशुपालक कुंदन कुमार ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी योजनाएं किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं के चारे, दवाइयों और डेयरी संचालन से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए जब तत्काल धन की जरूरत पड़ती है, तब केसीसी किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इससे उन्हें साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और व्यवसाय सुचारू रूप से चलता रहता है।

एक अन्य पशुपालक रविशंकर शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकारी योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि रियायती दरों पर मिलने वाले ऋण और अन्य सहायता कार्यक्रमों के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई परिवारों ने डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया है और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

पशुपालकों के अनुसार राष्ट्रीय गोकुल मिशन, ई-गोपाला ऐप, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ), किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा योजना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी योजनाओं ने डेयरी क्षेत्र को अधिक संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों के इस्तेमाल से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है तथा पशुपालकों की आय में भी सुधार दर्ज किया गया है।

एससीएचएएस

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