करीब चार एकड़ भूमि पर पारिवारिक दावे और न्यायालय में लंबित वाद का हवाला, कहा— दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद ही करें निवेश

जमशेदपुर: शहर की चर्चित आवासीय परियोजना “द सैफायर” एक बार फिर विवादों में घिर गई है। व्यवसायी एवं निर्माण कंपनी निदेशक अनूप रंजन ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दावा किया कि मानगो क्षेत्र में निर्माणाधीन इस परियोजना में उपयोग की जा रही लगभग 3.97 एकड़ जमीन उनके पारिवारिक हिस्से से जुड़ी हुई है और इस मामले में वर्षों से न्यायालय में वाद लंबित है।
अनूप रंजन ने आरोप लगाया कि जमीन विवाद और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी होने के बावजूद परियोजना से जुड़े कुछ लोगों द्वारा ग्राहकों, निवेशकों और बैंकों को गुमराह कर ऋण एवं निवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आम लोगों की मेहनत की कमाई फंस सकती है।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि मानगो क्षेत्र के वार्ड संख्या-3, आदित्यपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति थाना संख्या-63 अंतर्गत आती है। उनके अनुसार वर्ष 2016 में विवादित जमीन की पूरी रजिस्ट्री करा ली गई, जबकि जमीन के पारिवारिक बंटवारे का मामला न्यायालय में लंबित था।
अनूप रंजन ने कहा कि इस मामले में वर्ष 2013 से न्यायालय में वाद संख्या 39/2013 चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि 29 मई 2019 को न्यायालय ने जमीन बंटवारे के मामले में सर्वेक्षण हेतु प्लीडर कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद कथित रूप से विवादित भूमि पर निर्माण कार्य और बैंक ऋण की प्रक्रिया जारी रखी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शेयरधारकों द्वारा सरकारी विभागों में गलत जानकारी देकर म्यूटेशन और नक्शा स्वीकृति कराने का प्रयास किया गया। साथ ही उन्होंने रेरा न्यायालय में भी तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया।
अनूप रंजन ने कहा कि “द सैफायर” परियोजना वर्तमान में पूरी तरह विवादित है और मामला अब भी न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में Jharkhand High Court में डब्ल्यूपीसी/7576/2025 भी दायर किया गया है।
उन्होंने ग्राहकों, निवेशकों और बैंकों से अपील करते हुए कहा कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक परियोजना में निवेश या ऋण स्वीकृत करने से पहले सभी दस्तावेजों की गंभीरता से जांच अवश्य कर लें।
प्रेस वार्ता के दौरान अनूप रंजन ने यह भी कहा कि उनके पास मामले से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर वे उन्हें सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।
