नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3.08 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सब्जी, दूध, राशन, कैब सेवा और हवाई यात्रा तक महंगी हो सकती है।
देशभर में शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3.08 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। नई दरों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। तेल कंपनियों की ओर से बढ़ाई गई नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
पिछले कई सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते यह आशंका जताई जा रही थी कि भारत में भी ईंधन महंगा हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की आशंकाओं की तुलना में यह बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर जरूर दिखाई देगा।
बाजार और महंगाई पर पड़ेगा असर
आर्थिक जानकारों के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे बाजार पर पड़ता है। खासतौर पर डीजल देश की परिवहन व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है।
देश में ट्रक, बसें, कृषि उपकरण और बड़े जनरेटर मुख्य रूप से डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर धीरे-धीरे आम उपभोक्ता तक पहुंचता है।
सब्जी, दूध और राशन हो सकते हैं महंगे
फल, सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई बड़े पैमाने पर डीजल वाहनों से होती है। शुरुआत में ट्रांसपोर्ट कंपनियां किराया बढ़ाने से बचती हैं, लेकिन लंबे समय तक ईंधन महंगा रहने पर मालभाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी खराब होने वाले उत्पादों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट भी ईंधन पर आधारित होते हैं।
हवाई यात्रा भी हो सकती है महंगी
वैश्विक बाजार में जेट फ्यूल पहले से ही ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। जानकारों के मुताबिक शुरुआती दौर में कंपनियां अतिरिक्त लागत खुद वहन कर सकती हैं, लेकिन यदि ईंधन की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी रही तो घरेलू उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी संभव है।
कैब और डिलीवरी सेवाओं पर असर
ईंधन महंगा होने से ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म और कैब सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। फिलहाल कंपनियां बेस किराया स्थिर रख सकती हैं, लेकिन आने वाले समय में डिलीवरी चार्ज, सुविधा शुल्क और सर्ज प्राइसिंग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इधर, दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिससे ऑटो और टैक्सी चालकों की परेशानी और बढ़ सकती है।
किसानों पर बढ़ेगा बोझ
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी ईंधन मूल्य वृद्धि का असर पड़ने की आशंका है। किसान ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और फसल को मंडियों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर डीजल का उपयोग करते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी और आगे चलकर खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
