राज्यसभा चुनाव: झारखंड के लिए कांग्रेस ने भूपेश बघेल और अजय शर्मा को बनाया पर्यवेक्षक

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल और अजय शर्मा को झारखंड के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

कांग्रेस का यह कदम 18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनावों की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी अब तक 10 राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए सात उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कर्नाटक से अपना नामांकन दाखिल कर दिया, जिससे उनकी उम्मीदवारी औपचारिक रूप से तय हो गई।

कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवारों में कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान, मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती, राजस्थान से नीरज डांगी और झारखंड से प्रणव झा शामिल हैं।

राज्यसभा की 24 द्विवार्षिक रिक्त सीटों और महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा ओडिशा की तीन उपचुनाव सीटों के लिए चुनाव कराए जाएंगे। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 11 जून तक नाम वापस ले सकेंगे और मतगणना 18 जून की शाम को होगी।

कर्नाटक में खरगे का वर्तमान कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर कांग्रेस को विश्वास है कि वह राज्य की चार में से तीन सीटें जीतने में सफल रहेगी।

राज्यसभा चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली के तहत आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होते हैं, इसलिए राजनीतिक गठबंधन और विधायकों की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है।

झारखंड में कांग्रेस, जेएमएम के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है। 81 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 16 विधायक हैं।

हाल ही में पार्टी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए 36 सदस्यीय राजनीतिक मामलों की समिति का गठन किया है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को भी शामिल किया गया है।

कांग्रेस ने अपने विधायकों की संख्या का हवाला देते हुए गठबंधन से एक राज्यसभा सीट की मांग की थी और उसी के तहत प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि जेएमएम और कांग्रेस के संबंध सहयोगात्मक बने हुए हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और खनन जैसे मुद्दों पर कांग्रेस अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान भी बनाए हुए है।

डीएससी

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