September 11, 2026
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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना महिला सशक्तीकरण के दावों के विपरीत : संजय राउत

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना महिला सशक्तीकरण के दावों के विपरीत : संजय राउत

मुंबई, 10 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मीनाक्षी नटराजन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके बावजूद भी उनका नामांकन रद्द कर दिया गया है। आखिर यह क्या है? एक तरफ आप महिला शक्ति वंदन अधिनियम लाकर यह दावा करते हैं कि आपके लिए महिला सशक्तीकरण मायने रखता है, तो वहीं दूसरी तरफ आप एक महिला का नामांकन रद्द कर देते हैं। आखिर क्यों? आपने ऐसा करके एक महिला का अपमान किया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, उन्होंने मीनाक्षी नटराजन पर दर्ज केस का भी जिक्र किया। संजय राउत ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के ऊपर कोई भी केस दर्ज नहीं है। मैंने खुद उस पूरी वस्तुस्थिति को समझने का प्रयास किया है। लिहाजा मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है, उन्हें सिर्फ एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। अब इन लोगों के लिए नियम कायदे कानून भी अलग हो चुके हैं। एक नारी वंदना और पुरुष वंदना। परमल नाथवानी झारखंड से बीजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके नामांकन पत्र में कुछ खामियां थीं। लेकिन, वहां के रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें अपनी कमियों को दूर करने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। लेकिन, यह नियम और कानून नाथवानी के मामले में लागू नहीं किया गया है, बल्कि उनका नामांकन पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। आखिर यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? ये लोकतंत्र की हत्या है।

इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल पूरे होने के मौके पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के पूरे 12 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन, इन सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गया है, जब प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने विसंगति पूर्ण व्यवहार न किया हो।

उन्होंने कहा कि यह लोग महिला राजनेता को राजनीति में आने से रोक रहे हैं। सुनियोजित तरीके से उनका नामांकन खारिज कर रहे हैं, ताकि उन्हें राज्यसभा में आने से रोका जा सके और दूसरी तरफ यही लोग महिला मतदाताओं को रिझाने के मकसद से महिला शक्ति वंदन अधिनियम ला रहे हैं। आखिर ऐसी स्थिति में एक महिला को न्याय कैसे मिलेगा। अब ऐसे में सवाल यही है कि क्या हम चीफ जस्टिस से न्याय की उम्मीद कर सकते हैं। मौजूदा समय में हमारे न्यायतंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करके रख दिया गया है।

एसएचकेवीसी

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