गम्हरिया: विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, सरायकेला-खरसावां (बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची) की ओर से कांड्रा स्थित आजाद बस्ती में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केंद्र प्रमुख डॉ. पंकज सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
डॉ. सेठ ने कहा कि दूध एक संपूर्ण आहार है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान है। उन्होंने बताया कि विश्व दुग्ध दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि दूध को एक महत्वपूर्ण और सुलभ पोषण स्रोत के रूप में बढ़ावा देने का अभियान है। नियमित रूप से दूध का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है, मांसपेशियों के विकास में सहायक होता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। उन्होंने लोगों से प्रतिदिन कम से कम एक गिलास दूध पीने की अपील की।
उन्होंने दुग्ध उत्पादन से जुड़े आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और वैश्विक दुग्ध उत्पादन में उसका लगभग 25 प्रतिशत योगदान है। देश में वार्षिक दुग्ध उत्पादन 240 से 247 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। वहीं प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 470 ग्राम प्रतिदिन से अधिक है, जो वैश्विक औसत 322 ग्राम से काफी ज्यादा है।
डॉ. सेठ ने बताया कि झारखंड में वर्तमान में 31 लाख मीट्रिक टन से अधिक दूध का उत्पादन हो रहा है। राज्य में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता बढ़कर करीब 220 ग्राम प्रतिदिन हो गई है। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन इसमें लगातार सुधार हो रहा है।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। पिछले वर्ष केंद्र द्वारा 150 किसानों को व्यावसायिक गौ-पालन, उद्यमिता एवं कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए “स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण” विषय पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें पनीर, घी, मिठाई समेत अन्य दुग्ध उत्पाद तैयार करने की तकनीक सिखाई गई।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के बीच दूध से बनी छाछ का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. गोन्द्रा मार्डी, इलिसमा खाखा, कुमारी सीमरन, देवाशीष, सोमा प्रमाणिक, चैतन, विनाद, सुशील, रिया डे, मंजू शर्मा, रिषा प्रमाणिक, प्रदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं और बच्चे उपस्थित थे।
