पीएम मोदी नीट पेपर मामले पर नजर रख रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान

नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर उठे विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी गड़बड़ियां रुकने वाली नहीं हैं।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ नीट-यूजी परीक्षा में सुधारों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) में बदलने और परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग की गई है।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के युवाओं पर पड़ता है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों पर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ संस्थागत जिम्मेदारी तय करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस अधिकारी या व्यक्ति की क्या जिम्मेदारी है।

अदालत ने कहा, “असल समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती। यह पता होना चाहिए कि कौन व्यक्ति किस जिम्मेदारी को संभाल रहा है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद दर्दनाक होती हैं। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत, समय और भावनाओं के साथ इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

अदालत ने टिप्पणी की, “हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते। यह सिर्फ छात्र का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और संघर्ष का सवाल है।”

सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए की कार्यशैली को ‘एड-हॉक’ बताते हुए कहा कि देश की परीक्षा संस्थाओं को मजबूत और स्थायी ढांचे के साथ काम करना चाहिए। अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि एनटीए को यूपीएससी जैसी संस्थाओं से सीखने की जरूरत है, जिन्होंने बड़े स्तर की परीक्षाएं बिना विवाद के सफलतापूर्वक कराई हैं।

अदालत ने आईआईटी समेत विशेषज्ञ संस्थानों के साथ लगातार सहयोग बढ़ाने की भी सलाह दी, ताकि परीक्षा सुरक्षा और प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा सके।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह एनटीए की संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने साफ कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी घटनाएं दोबारा न हों। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

वीकेयू

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