जामताड़ा : शादी को आमतौर पर जीवनभर का साथ माना जाता है, लेकिन झारखंड के जामताड़ा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया।
करमाटांड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले 64 वर्षीय अर्जुन और 60 वर्षीय सोना ने शादी के 45 वर्ष बाद आपसी सहमति से तलाक लेकर अपने वैवाहिक रिश्ते को समाप्त कर दिया। दोनों के बच्चे बड़े हो चुके हैं और परिवार में नाती-पोते भी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जीवन के इस पड़ाव पर अलग-अलग रहने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार, अर्जुन और सोना ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत जामताड़ा फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार ने दोनों पक्षों को रिश्ता बचाने के लिए समझाने का प्रयास किया। अदालत ने उन्हें मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने की सलाह देते हुए छह महीने का समय भी दिया।
हालांकि, निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। अगली सुनवाई में दोनों अदालत पहुंचे और अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद फैमिली कोर्ट ने उनकी आपसी सहमति को स्वीकार करते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। अब दोनों शेष जीवन अलग-अलग बिताएंगे।
तलाक की वजहों को लेकर पति अर्जुन का कहना है कि उनकी पत्नी कई वर्षों से मायके में रह रही थीं। उन्होंने कई बार पत्नी को वापस आने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं लौटीं। अर्जुन का कहना है कि जब साथ रहना ही नहीं है तो विवाह का कोई औचित्य नहीं बचता।
वहीं, पत्नी सोना ने आरोप लगाया कि उनके पति अक्सर विवाद करते थे और कोई स्थायी काम-धंधा भी नहीं करते थे। उनका कहना है कि लगातार तनावपूर्ण माहौल में रहने से बेहतर है कि दोनों अलग-अलग अपनी जिंदगी बिताएं।
मामले से जुड़े अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि दोनों ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद तलाक की अनुमति दे दी।
दंपति के दो बेटे और एक बेटी हैं तथा परिवार में नाती-पोतों का भी साथ है, लेकिन लंबे समय से चले आ रहे मतभेद, गलतफहमी, जिद और अहंकार के कारण अंततः 45 वर्ष पुराना वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया।
