September 5, 2026
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Garhwa News: KYC में देरी से इलाज नहीं करा सके आदिवासी रतन लकड़ा, मौत के बाद शव लेकर बैंक पहुंचे परिजन, लगाया लापरवाही का आरोप

Garhwa News: KYC में देरी से इलाज नहीं करा सके आदिवासी रतन लकड़ा, मौत के बाद शव लेकर बैंक पहुंचे परिजन, लगाया लापरवाही का आरोप

गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में एक आदिवासी परिवार की पीड़ा ने सरकारी व्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि बैंक में पेंशन की राशि जमा होने के बावजूद समय पर केवाईसी (KYC) नहीं होने के कारण पैसे नहीं मिल सके। आर्थिक तंगी और इलाज के अभाव में रतन लकड़ा की मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव लेकर बैंक पहुंचे और धरने पर बैठ गए।

गढ़वा जिले में बैंकिंग व्यवस्था की कथित लापरवाही के खिलाफ सोमवार को एक मार्मिक और आक्रोशपूर्ण विरोध देखने को मिला। इलाज के अभाव में आदिवासी रतन लकड़ा की मौत के बाद उनके परिजन और ग्रामीण शव लेकर झारखंड ग्रामीण बैंक पहुंचे और धरना देकर बैंक प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

परिजनों का आरोप है कि रतन लकड़ा के खाते में सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन की राशि नियमित रूप से आती थी। परिवार इसी पैसे से उनका इलाज कराना चाहता था, लेकिन खाते से राशि निकालने के लिए केवाईसी (KYC) पूरा नहीं होने का हवाला देकर बैंक ने भुगतान नहीं किया। उनका कहना है कि बैंक की इसी लापरवाही के कारण समय पर इलाज नहीं हो सका और आखिरकार रतन लकड़ा ने दम तोड़ दिया।

तीन महीने तक KYC के लिए लगवाए चक्कर

मृतक के परिजनों के अनुसार, बैंक प्रबंधन ने करीब तीन महीने तक केवाईसी के नाम पर उन्हें लगातार दौड़ाया। जब रतन लकड़ा की हालत बेहद गंभीर हो गई, तब क्षेत्रीय प्रबंधक (रीजनल मैनेजर) के निर्देश पर परिजन उन्हें मरणासन्न अवस्था में बैंक लेकर पहुंचे, जहां उनका ई-केवाईसी पूरा किया गया।

परिजनों का आरोप है कि केवाईसी होने के बाद भी उन्हें खाते से राशि नहीं दी गई। लगातार बैंक के चक्कर लगाने के बावजूद पैसे नहीं मिले, जिससे इलाज रुक गया और अंततः रतन लकड़ा की मौत हो गई।

शव लेकर बैंक पहुंचे परिजन, कार्रवाई की मांग

रतन लकड़ा की मौत के बाद गुस्साए परिजन और ग्रामीण उनका शव लेकर बैंक पहुंचे। उन्होंने बैंक परिसर में धरना देते हुए बैंक अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर खाते से पैसे मिल जाते तो रतन लकड़ा का इलाज कराया जा सकता था और संभव है कि उनकी जान बच जाती।

बैंक प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार

वहीं, बैंक अधिकारियों ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि रतन लकड़ा का ई-केवाईसी पूरा हो चुका था। बैंक के अनुसार, केवाईसी के बाद राशि निकालने के लिए कोई भी परिजन बैंक नहीं आया, इसलिए खाते से भुगतान नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि अब रतन लकड़ा की मृत्यु के बाद परिजन शव लेकर बैंक पहुंचे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी

इस मामले में परिजन और बैंक प्रबंधन दोनों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा कि भुगतान में देरी की वास्तविक वजह क्या थी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है। फिलहाल यह घटना ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था, केवाईसी प्रक्रिया और जरूरतमंद लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

यदि सही मायने में बैंक कर्मचारियों की गलती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं यह तो जांच का मामला है लेकिन पैसे के अभाव में उसकी जान चली गई।

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