टीएमसी ने बताया विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश
मुख्य बिंदु:
- ममता बनर्जी के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात
- टीएमसी ने भाजपा पर लोकतांत्रिक अधिकार कुचलने का आरोप लगाया
- कुणाल घोष बोले, बारुईपुर यात्रा से पहले बैरिकेड्स लगाए गए
कोलकाता – पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर सुरक्षाबलों की भारी मौजूदगी से नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है, जिसे तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष को चुप कराने की रणनीति करार दिया है।
भाजपा शासित केंद्र सरकार पर टीएमसी ने गंभीर टिप्पणी की है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सत्ता पक्ष विरोधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है।
हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। टीएमसी नेताओं ने सोशल मीडिया मंच एक्स के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की।
पार्टी की आधिकारिक पोस्ट में कहा गया कि सत्तारूढ़ दल का उद्देश्य केवल विरोधी स्वरों, आवाजाही और लोकतांत्रिक हकों पर अंकुश लगाना है। इसे लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की बारुईपुर जाने की योजना थी। मगर यात्रा की भनक लगते ही आवास के बाहर पुलिसकर्मियों की भीड़ जुट गई और बैरिकेडिंग शुरू हो गई।
उन्होंने आगे बताया कि सूत्रों के हवाले से यह बैरिकेडिंग अगले दिन तक जारी रह सकती है। “पूरी तैयारी के बावजूद माहौल तनावग्रस्त बना हुआ है,” एक स्थानीय पर्यवेक्षक ने बताया।
इस बीच पुलिस विभाग ने अभी तक इस कार्रवाई पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है।
सांसद सागरिका घोष ने भी इस मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूछा कि आखिर किस वजह से मुख्यमंत्री के निवास पर इतनी सख्ती बरती जा रही है।
उनका आरोप है कि राज्य में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद असली मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है। कानून-व्यवस्था सुधारने के बजाय विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।
बंगाल की सियासत में भाजपा और तृणमूल के बीच यह तकरार नई नहीं है। दोनों पक्षों में लगातार बयानबाजी जारी है।
गौरतलब है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और हर घटना पर दलों की पैनी नजर बनी हुई है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को हाल ही में एक अन्य मामले में भी दस्तावेज जमा करने को कहा गया था, जिससे पार्टी पहले से ही दबाव में नजर आ रही है।
दूसरी ओर भाजपा की ओर से इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं की गई है।
आगे इस मामले में और स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
(आईएएनएस से प्राप्त इनपुट पर आधारित)
