धनबाद: झारखंड के धनबाद जिला अंतर्गत मटकुरिया गोलीकांड 15 वर्षों बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे इंतजार के बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक सहित 30 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ वर्ष 2011 की चर्चित घटना एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है, जब बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के क्वार्टरों को खाली कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मटकुरिया इलाके में पहुंची थी। प्रशासन की कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध किया, जिसके बाद माहौल तेजी से तनावपूर्ण हो गया।
देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव तथा टकराव की स्थिति उत्पन्न होने पर हालात बेकाबू हो गए। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
इस गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया था और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी थी।
इस मामले में तत्कालीन धनबाद सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के आवेदन के आधार पर बैंक मोड़ थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिसमें तत्कालीन मंत्री मन्नान मल्लिक का नाम भी शामिल था। इसके बाद मामला अदालत में लगातार 15 वर्षों तक विचाराधीन रहा।
सभी पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक सहित 30 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
अदालत के इस फैसले को मटकुरिया गोलीकांड के लंबे कानूनी संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। वर्षों से लंबित इस मामले में आए निर्णय के बाद एक बार फिर 2011 की उस हिंसक घटना और उससे जुड़े घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गए हैं।
