जमशेदपुर, 19 जुलाई: टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) के न्यूरोसर्जरी विभाग की ओर से 18 जुलाई को “न्यूरोवैस्कुलर विकारों का एंडोवैस्कुलर प्रबंधन : एक व्यावहारिक दृष्टिकोण” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं से जुड़े डॉक्टरों ने भाग लिया और न्यूरोवैस्कुलर रोगों के आधुनिक, मिनिमली इनवेसिव उपचार की नवीनतम तकनीकों पर विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम का उद्घाटन टीएमएच की जनरल मैनेजर (मेडिकल सर्विसेज) डॉ. विनिता सिंह ने किया। इस दौरान चीफ ऑफ मेडिकल इनडोर सर्विसेज डॉ. अशोक सुंदर, चीफ ऑफ मेडिकल सपोर्ट सर्विसेज डॉ. ममता रथ दत्ता, न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. जीवेश मल्लिक सहित अस्पताल के विभिन्न विभागाध्यक्ष, कंसल्टेंट, फैकल्टी सदस्य और स्वास्थ्य पेशेवर उपस्थित रहे।
सीएमई के मुख्य वक्ता नई दिल्ली के प्रसिद्ध न्यूरो-इंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. पीयूष तोमर रहे। उन्होंने संवादात्मक व्याख्यान और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को न्यूरोवैस्कुलर रोगों के एंडोवैस्कुलर उपचार में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान इंट्राक्रैनियल एन्यूरिज्म, एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक, आर्टेरियोवेनस मैलफॉर्मेशन (एवीएम) तथा ड्यूरल एवं स्पाइनल आर्टेरियोवेनस फिस्टुला (एवीएफ) जैसी जटिल बीमारियों के उपचार में एंडोवैस्कुलर इंटरवेंशन की बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बेहतर उपचार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समय पर जांच, शीघ्र रेफरल, बहु-विषयक समन्वय और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हैंड्स-ऑन वर्कशॉप में प्रतिभागियों को एंडोवैस्कुलर उपकरणों और प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कैथेटर एवं गाइडवायर के संचालन, प्रक्रिया की योजना बनाने और सिमुलेशन आधारित तकनीकों का अभ्यास कराया गया, जिससे डॉक्टरों को आधुनिक न्यूरो-इंटरवेंशनल उपचार पद्धतियों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला।
सीएमई में 70 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया, जबकि व्यावहारिक कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञताओं के 40 डॉक्टर शामिल हुए। प्रतिभागियों ने इस पहल को ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक दृष्टि से उपयोगी बताया।
टीएमएच प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रमों का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करना, विशेषज्ञों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना और भविष्य में अस्पताल में एडवांस एंडोवैस्कुलर न्यूरो-इंटरवेंशनल सेवाओं की शुरुआत की दिशा में मजबूत आधार तैयार करना है।
