रेलवे यार्ड में 30 मई को करंट लगने से परसुडीह निवासी आशीष माझी की हो गई थी मौत
परिवार न्याय की लड़ाई जारी रखेगा, उचित मुआवजा व नौकरी की मांग से नहीं हटेगा पीछे
जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे यार्ड में ड्यूटी के दौरान हाईटेंशन ओवरहेड लाइन की चपेट में आने से झुलसे तकनीशियन आशीष माझी की मौत को लेकर परिजन और रेलवे प्रशासन के बीच गतिरोध और तनाव बरकरार। परिवार ने लिखित रूप से मुआवजा और नौकरी की गारंटी मिलने तक अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया है।
सोमवार को एरिया रेल मैनेजर (एआरएम) समीर सौरभ की अध्यक्षता में रेलवे अधिकारियों, मृतक के परिजनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ त्रिपक्षीय बैठक हुई। करीब दो घंटे तक चली यह वार्ता का दूसरा दौर था, लेकिन परिवार की प्रमुख मांगों—परिवार के एक सदस्य को स्थायी रेलवे में नौकरी और कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
परिजनों का कहना है कि हादसा रेलवे परिसर में ड्यूटी के दौरान हुआ था, इसलिए उनकी पुनर्वास संबंधी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की है। बैठक में रेलवे अधिकारियों ने आर्थिक सहायता और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन किसी भी प्रकार का लिखित आश्वासन देने से परहेज किया। नतीजा वार्ता बेनतीजा रही।
मृतक के परिवार का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित गारंटी नहीं दी जाती, तब तक आशीष माझी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
इस स्थिति से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो रेल गेट जाम करेंगे और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने दो दौर की बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवार न्याय की लड़ाई जारी रखेगा और उचित मुआवजा एवं नौकरी की मांग से पीछे नहीं हटेगा।
जानकारी के अनुसार, परसुडीह के शंकरपुर निवासी आशीष माझी 30 मई को टाटानगर रेलवे यार्ड में खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच की छत पर लगे एयर कंडीशनिंग सिस्टम की मरम्मत कर रहे थे।
इसी दौरान उनका संपर्क ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से हो गया, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों, स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है। वार्ता बेनतीजा रहने और आंदोलन की तैयारियां तेज होने के बीच रेलवे प्रशासन पर जल्द समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हालांकि मृतक के परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि नौकरी और मुआवजा का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही आशीष माझी का अंतिम संस्कार करेंगे

