पटमदा : पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड की बोंटा पंचायत अंतर्गत मिर्जाडीह गांव में स्थित लगभग दो एकड़ क्षेत्रफल वाले सार्वजनिक तालाब और सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।
सोमवार से शुरू हुए इस आंदोलन को मंगलवार को 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं होने पर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।
मिर्जाडीह तालाब के समीप झारखंड मानवाधिकार संघ के बैनर तले आयोजित धरना में संघ के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण तेज धूप के बावजूद डटे रहे। आंदोलनकारियों का कहना है कि तालाब और सार्वजनिक मार्ग गांव की सामुदायिक संपत्ति हैं, जिनकी सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है।
झारखंड मानवाधिकार संघ के कोल्हान प्रभारी राधाकृष्ण सिंह मुंडा एवं राधेश्याम सिंह सरदार ने बताया कि धरना शुरू होने के बाद से अब तक बोड़ाम अंचल कार्यालय या प्रशासन का कोई अधिकारी बातचीत के लिए धरना स्थल नहीं पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि जब तक तालाब और सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघ के नेताओं ने जानकारी दी कि संगठन की केंद्रीय कमेटी के सदस्य दिनेश कीनू के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात करेगा।
प्रतिनिधिमंडल ग्रामीणों की समस्याओं और तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग से प्रशासन को अवगत कराएगा। इस दौरान गांव में धरना कार्यक्रम पूर्ववत जारी रहेगा।
धरना स्थल पर राधाकृष्ण सिंह मुंडा, अमर सिंह सरदार, शंभू सिंह, गोबिंद सिंह सरदार, राधेश्याम सिंह सरदार, देवनाथ सिंह सरदार, फुलचंद मुर्मू, अंतु सरदार, गुरुपद सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
वहीं, मामले पर बोड़ाम के अंचल अधिकारी रंजीत रंजन ने कहा कि संबंधित भूमि प्रथम दृष्टया रैयती प्रकृति की प्रतीत होती है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व कर्मचारी को निर्देश दिया गया है। भूमि की नापी और जांच पूरी होने के बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
