September 8, 2026
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जमशेदपुर

जिले को मिली आपदा प्रबंधन में बड़ी ताकत: जमशेदपुर में तैनात हुई NDRF यूनिट, राहत-बचाव कार्यों में मिलेगी नई गति

जिले को मिली आपदा प्रबंधन में बड़ी ताकत: जमशेदपुर में तैनात हुई NDRF यूनिट, राहत-बचाव कार्यों में मिलेगी नई गति

जमशेदपुर, 4 जुलाई —
पूर्वी सिंहभूम जिला अब आपदाओं से लड़ने के लिए और भी सशक्त हो गया है। जिले में अब नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की 30 सदस्यीय विशेष यूनिट स्थायी रूप से तैनात कर दी गई है। यह महत्वपूर्ण कदम जिला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के अनुरोध पर राज्य सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्वीकृत किया गया है।

इस यूनिट की तैनाती से न केवल राहत और बचाव कार्यों की गति बढ़ेगी, बल्कि प्रभावशीलता और समन्वय भी पहले से कहीं बेहतर होगा।

अब नहीं करना होगा रांची या पटना से इंतजार
अब तक किसी भी आपात स्थिति—जैसे बाढ़, डूबने की घटना, औद्योगिक हादसा, भूस्खलन या गैस रिसाव—में NDRF को रांची, पटना या अन्य दूरस्थ केंद्रों से बुलाना पड़ता था। इसमें कीमती समय नष्ट हो जाता था और राहत कार्यों में देरी होती थी।
अब स्थानीय NDRF यूनिट की उपलब्धता से यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी और “रेस्पॉन्स टाइम” में उल्लेखनीय कमी आएगी।

30 सदस्यीय दक्ष यूनिट, हर चुनौती से निपटने को तैयार
जमशेदपुर में तैनात इस टीम में 4 अधिकारी और 26 प्रशिक्षित जवान शामिल हैं।
ये सभी जवान आपदा प्रबंधन के विभिन्न आयामों जैसे:

बाढ़ और जलजमाव,

नदी/जलाशयों में डूबने की घटनाएं,

औद्योगिक हादसे (गैस रिसाव आदि),

भूकंप और भूस्खलन,

ऊंची इमारतों या पहाड़ी क्षेत्रों से रेस्क्यू,

और अन्य आपात परिस्थितियों में राहत-बचाव कार्य

के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। टीम आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा संसाधनों से लैस है।

तैनाती के साथ ही शुरू किया एक्शन: जादूगोड़ा में रेस्क्यू ऑपरेशन
टीम ने जमशेदपुर पहुंचने के तुरंत बाद जादूगोड़ा जलाशय में डूबे एक युवक की तलाश में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि टीम न केवल तैनात है, बल्कि पूरी तरह तैयार और सक्रिय मोड में है।

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने बताया कि मानसून के दौरान जिले में बाढ़ और जलजमाव की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए उन्होंने राज्य सरकार को स्थायी NDRF यूनिट की मांग भेजी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

पूर्व की घटनाओं से सीखा सबक, अब मिलेगी त्वरित राहत
जिला प्रशासन को इस कदम की आवश्यकता पूर्व की आपदाओं से मिले अनुभव से समझ आई।
चाहे वह:

एमजीएम अस्पताल में आग की घटना हो,

बाढ़ की स्थितियां,

या फिर एनएच पर गैस रिसाव,

इन सभी मौकों पर NDRF की तत्काल सेवाओं की कमी महसूस की गई थी। इस अनुभव ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्यों न जिले में ही NDRF की यूनिट स्थायी रूप से हो।

सुदूर क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना होगा आसान
पूर्वी सिंहभूम का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। कई गांव अभी भी दुर्गम इलाकों में स्थित हैं।
उपायुक्त ने कहा कि NDRF की स्थानीय उपस्थिति से इन दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी समय रहते राहत पहुंचाना संभव होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जिला प्रशासन अब आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और भी सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठा रहा है।

नवीन तैनाती से जनता को सुरक्षा का भरोसा
स्थानीय स्तर पर NDRF की यूनिट न केवल एक तकनीकी संसाधन है, बल्कि यह आमजन के लिए सुरक्षा और राहत का एक भरोसा भी है। अब किसी आपात स्थिति में प्रशासन प्रशिक्षित बल और उपकरणों से लैस होकर तत्काल कार्रवाई कर सकेगा।

निष्कर्ष: सुरक्षा के मोर्चे पर जिले को मिला मजबूत साथी
पूर्वी सिंहभूम में NDRF की स्थायी तैनाती न केवल जिले के आपदा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करती है, बल्कि यह एक रणनीतिक और समयोचित पहल है। इससे जिला अब “आपदा से पहले तैयारी, और आपदा के समय त्वरित कार्रवाई” की नीति पर और मजबूती से अमल कर सकेगा।

“अब आपदा की घड़ी में मदद दूर से नहीं, पास से मिलेगी — और वह भी समय पर।”

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