September 11, 2026
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एनसीपी नेता छगन भुजबल बोले, उन्हें भी वही न्याय मिलना चाहिए जो दूसरों को मिला

एनसीपी नेता छगन भुजबल बोले, उन्हें भी वही न्याय मिलना चाहिए जो दूसरों को मिला

मुंबई, 8 जून (आईएएनएस)। एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने सोमवार को उन खबरों को खारिज कर दिया कि उनके साथ अन्याय हुआ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह भी उसी न्याय के हकदार हैं जो दूसरों को मिला है।

18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार राजेंद्र जैन के नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए छगन भुजबल ने माना कि वह खुद नामांकन पाना चाहते थे, और उन्होंने पार्टी से यह भी कहा था कि उनके भतीजे और पूर्व सांसद समीर भुजबल को उनकी मंत्री वाली सीट दी जाए।

उन्होंने अपने बचाव में कहा कि राज्य में ऐसे कई उदाहरण हैं।

उन्होंने कहा कि एनसीपी विधायक मकरंद पाटिल राज्य कैबिनेट में मंत्री हैं, जबकि उनके भाई नितिन पाटिल राज्यसभा सदस्य हैं। सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम हैं, जबकि उनके बेटे पार्थ पवार राज्यसभा में हैं। एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम हैं, जबकि उनके बेटे श्रीकांत शिंदे लोकसभा में हैं, इसलिए मेरी भी इच्छा थी कि अगर मुझे राज्यसभा का नामांकन मिलता है तो मेरे भतीजे समीर भुजबल को राज्य कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। मैं भी वही न्याय चाहता था जो दूसरों को मिला।

भुजबल ने इस बात से इनकार किया कि भाजपा ने उनके प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि जब भी राज्य कैबिनेट का विस्तार होगा, इस पर विचार किया जाएगा और समीर भुजबल को मंत्री पद मिलेगा।

उन्होंने साफ किया कि जब तक मेरा प्रस्ताव भाजपा के सामने रखा गया, तब तक फैसला लेने के लिए सिर्फ एक दिन बचा था। भाजपा ने जवाब दिया कि समीर भुजबल को शामिल करने पर राज्य कैबिनेट के अगले विस्तार के दौरान विचार किया जाएगा, इसलिए यह कहना गलत है कि भाजपा ने इसे ठुकरा दिया।

जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या उनके साथ अन्याय हुआ है, तो भुजबल ने कहा कि कैसा अन्याय? आजकल चीजें ऐसे ही चलती हैं। हमारी नीति है ‘आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों।’ मैं कबड्डी खिलाड़ी हूं, शतरंज का खिलाड़ी नहीं।

उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि मैं नाराज नहीं हूं। नाराज होने की क्या बात है? लेकिन जो न्याय दूसरों को मिला, वही मुझे भी मिलना चाहिए था। दूसरे नेता राज्यसभा या लोकसभा में हैं, और उनके बच्चे यहां राज्य में मंत्री हैं। मैं एनसीपी बनने के समय से ही उसे खड़ा करने में सबसे आगे रहा हूं, इसलिए मेरी बस यही मांग थी कि मुझे भी वही न्याय मिले।

खास बात यह है कि जब समीर भुजबल के लिए मंत्री पद न मिलने पर भुजबल ने अपना नाम वापस ले लिया तो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा के लिए अपने करीबी सहयोगी राजेंद्र जैन के नाम की सिफारिश की। इस नाम को कोर कमेटी और खासकर पार्थ पवार ने मंजूरी दी।

डीकेएमडीकेपी

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