रांची : झारखंड में संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा के आधार पर नियुक्त किए गए 2017 कर्मचारियों की नौकरी तो फिलहाल बहाल हो गई है, लेकिन वेतन भुगतान को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं हुई है। परीक्षा परिणाम रद्द किए जाने के बाद बने प्रशासनिक पेच के कारण विभिन्न विभागों में इन कर्मचारियों के वेतन का भुगतान लंबित है। पिछले महीने वेतन नहीं मिलने के बाद अब चालू महीने में भी भुगतान को लेकर असमंजस बना हुआ है।
कोर्ट के आदेश के बाद काम पर लौटे कर्मचारी
CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा परिणाम रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके बाद परीक्षा के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया था। हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इन कर्मचारियों को दोबारा अपने पदों पर काम करने की अनुमति मिली।
कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी संबंधित विभागों में सेवा दे रहे हैं, लेकिन वेतन भुगतान की प्रशासनिक प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। कई विभाग इस संबंध में कार्मिक विभाग और वित्त विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
पुराने आदेश के कारण भुगतान में तकनीकी अड़चन
विभागीय स्तर पर बताया जा रहा है कि कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने के बाद पहले जारी कार्यमुक्ति संबंधी आदेश को वापस लेना जरूरी है। जब तक पूर्व आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कत बनी रह सकती है।
श्रम विभाग समेत कुछ अन्य विभागों ने वेतन भुगतान को लेकर वित्त विभाग से मार्गदर्शन मांगा है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि कार्मिक विभाग की ओर से आवश्यक आदेश जारी होने के बाद लंबित वेतन भुगतान का रास्ता साफ होगा।
हाईकोर्ट ने कार्यमुक्त करने के फैसले पर लगाई थी रोक
CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नियुक्त कर्मचारियों को सेवा से हटाने के सरकार के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। अदालत ने प्रभावित कर्मियों को मामले के अंतिम निपटारे तक अपने पदों पर काम करते रहने का निर्देश दिया था।
कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों की सेवा तो जारी रही, लेकिन विभिन्न विभागों में उन्हें कार्य लेने और वेतन भुगतान को लेकर स्थिति एक जैसी नहीं रही। इसी वजह से विभागों ने कार्मिक विभाग से स्पष्ट निर्देश की मांग की है।
कर्मचारियों को फिर से कार्य आवंटित करने की तैयारी
इधर, कार्मिक विभाग ने इन कर्मचारियों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित शाखाओं से कार्य आवंटन के प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों को उनके पद के अनुरूप जिम्मेदारी दी जाएगी।
संभावना है कि फिलहाल कर्मचारियों से वही कार्य कराया जाए, जो उनकी नियुक्ति के समय निर्धारित था। कार्य आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वेतन भुगतान को लेकर भी प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
2017 कर्मचारी वेतन भुगतान की प्रतीक्षा में
वेतन भुगतान को लेकर बने असमंजस से कुल 2017 कर्मचारी प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें 195 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, 252 प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, 185 अंचल निरीक्षक सह कानूनगो, 863 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, 335 कनीय सचिवालय सहायक, 182 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और पांच प्लानिंग असिस्टेंट शामिल हैं।
इन कर्मचारियों की नजर अब कार्मिक और वित्त विभाग के अगले आदेश पर है। पूर्व में जारी कार्यमुक्ति संबंधी आदेश को वापस लेने और वेतन भुगतान की प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद ही लंबित वेतन का भुगतान शुरू होने की उम्मीद है।