जमशेदपुर : जमशेदपुर में चर्चित निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। मामले में गिरफ्तार सोनारी खूंटाडीह निवासी अशोक सिंह उर्फ राघव के कथित बयान के आधार पर हत्या के पीछे जमीन विवाद, आपराधिक वर्चस्व, रंगदारी और डिजिटल मीडिया के जरिए कथित ब्लैकमेलिंग से जुड़े नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है।
पुलिस जांच में सामने आए इन दावों के अनुसार, निखार सबलोक को रास्ते से हटाने की साजिश लंबे समय से चल रही थी और इसके लिए उसकी रेकी से लेकर हत्या तक की भूमिका अलग-अलग लोगों को सौंपी गई थी।
इस हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। हत्याकांड में गिरफ्तार सोनारी खूंटाडीह निवासी अशोक सिंह उर्फ राघव के कथित बयान में जमीन के विवाद, रंगदारी, आपराधिक वर्चस्व और न्यूज पोर्टल के माध्यम से कथित ब्लैकमेलिंग से जुड़े नेटवर्क का जिक्र किया गया है।
हालांकि, इन बयानों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।
2021 के बाद शुरू हुआ विवादित जमीनों का सेटलमेंट
पुलिस को दिए कथित बयान के अनुसार, वर्ष 2021 में जेल से बाहर आने के बाद राघव ने विक्रम शर्मा के साथ मिलकर विवादित जमीनों के सेटलमेंट का काम शुरू किया। आरोप है कि कारोबारियों और प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से न्यूज 26 नाम से डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और एक प्रिंट मीडिया संस्थान का निबंधन कराया गया था।
राघव के कथित बयान में इन मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कारोबारियों को धमकाने और कथित तौर पर ब्लैकमेल करने के लिए किए जाने का दावा किया गया है। हत्या के बाद से ही निखार सबलोक हत्याकांड में जमीन कारोबार और आपराधिक वर्चस्व का एंगल चर्चा में रहा है।
विक्रम शर्मा की हत्या के बाद बढ़ा गैंगवार का एंगल
कथित बयान के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 को देहरादून में मानगो निवासी अपराधी गणेश सिंह के गुर्गों ने गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या कर दी थी। विक्रम शर्मा की मौत के बाद दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह के निर्देश पर आपराधिक और कथित अवैध कारोबार की जिम्मेदारी राघव को सौंपे जाने का दावा किया गया है।
इसी दौरान विक्रम शर्मा की हत्या का बदला लेने की साजिश रचे जाने की बात भी कथित बयान में सामने आई है।
जमीन विवाद को लेकर निखार से बढ़ी दुश्मनी
जांच में सामने आए कथित बयानों के अनुसार, गणेश सिंह का गुर्गा बताए जाने वाले निखार सबलोक और मोनू सिंह सोनारी में राघव के कब्जे वाली विवादित जमीन तथा सिदगोड़ा में टाटा लीज की जमीन से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर रहे थे। जमीन विवाद और वर्चस्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।
20 लाख की सुपारी और पांच लाख में रेकी का दावा
राघव के कथित बयान के अनुसार, दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह की ओर से गणेश सिंह और निखार सबलोक को रास्ते से हटाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सिंटू सिंह, सुशील केराई, सुनील रजक, कलाम और रितेश सिंह के साथ मिलकर कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई।
बताया गया है कि निखार की गतिविधियों और लोकेशन की रेकी के लिए सुशील केराई को पांच लाख रुपये नकद दिए गए थे। कथित तौर पर पूरी हत्या के लिए 20 लाख रुपये की सुपारी तय होने की बात भी सामने आई है।
हत्या से पहले सोशल मीडिया पर धमकी
हत्याकांड से पहले राघव के फेसबुक प्रोफाइल से कथित तौर पर एक धमकी भरा पोस्ट भी किया गया था। इस पोस्ट में बदला लेने और साथ देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जैसी बातें लिखी गई थीं। पुलिस इस सोशल मीडिया पोस्ट को भी हत्याकांड की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देख रही है।
कोलकाता से बंगाल के दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
इस मामले में एसआईटी ने कोलकाता के बेलियाघाटा ट्रैफिक गार्ड में तैनात ट्रैफिक सार्जेंट के साथ सिविक वोलंटियर को गुरुवार रात पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
अब तक छह आरोपी भेजे गए जेल
निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें सोनारी खूंटाडीह निवासी अशोक सिंह उर्फ राघव, उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर निवासी कथित शूटर अंकित सिंह, सोनारी निवासी सुशील केराई, मानगो निवासी सुनील रजक, मानगो डिमना रोड निवासी रितेश सिंह और उत्तर प्रदेश सुलतानपुर निवासी राज कुमार सिंह उर्फ प्रिंस शामिल हैं।
हालांकि, पुलिस की जांच अभी जारी है। गिरफ्तारियों के बावजूद पुलिस की नजर कथित मुख्य शूटर और हत्याकांड से जुड़े अन्य लोगों पर बनी हुई है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी के साथ पुलिस मामले में सामने आए आर्थिक लेनदेन, जमीन विवाद और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।